गरीबों का संसार नष्ट करनेवाली शराबबंदी कायम रखे

  • जिले के 847 गावों की मांग

गडचिरोली. हाल के कुछ दिनों से जिले की शराबबंटी हटाने के के प्रयास की चर्चाएं हो रही है। किंतु शराब के दुष्परिणाम को देखते हुए 847 गावों निवासियों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर जिले की शराबबंदी का समर्थन दिया है। गरीबों का संसार नष्ट करनेवाली शराब जिले में बंद ही रहे इस मांग के आशय का निवेदन ग्रामीणों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को प्रेषित किया है।

शराब की वजह से जिले के कई परिवार बर्बाद हो गये, महिलाओं को विधवा व भावी पीढी नशे की बुरी लत लानेवाली शराब जिले में शराबबंदी के लिए 1988 से 1992 में अभियान चलाया गया। समाजसेवी, राजनीतिक नेता व अनेक गावों के प्रयासों से अंतत: 1993 में जिले में शराबबंदी लागू हुई। जिससे शराब पीनेवालों की संख्या में गिरावट हुई। गांव में विवादों का प्रमाण कम हुआ। इस शराबबंदी का जिले भारी मात्रा में लाभ हुआ। मात्र कुछ राजनीतिक नेताओं ने शराबबंदी हटाने के लिए प्रयास शुरू किया है। जिले के शराबबंदी पर खतरा आने की बात पता चलते ही 847 गांव शराबबंदी कायम रखने के लिए एकजुट हो गए  है। गांव के विकास हेतु दिक्कत पैदा करनेवाली शराब खुलेआम मिलने पर पीनेवालों की संख्या में वृद्धी होगी। परिवारों को भारी आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड सकता है। जिससे शराबबंदी कायम रखने के लिए गांव गांव  में प्रस्ताव लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजे जा रहे है।

इन गांवों का समावेश

अब तक 847 ग्रामों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। जिसमें अहेरी तहसील के 44, आरमोरी 40, भामरागड 73, चामोर्शी 78, देसाईगंज 28, धानोरा 93, एटापल्ली 104, गडचिरोली 87, कोरची 69, कुरखेडा 79, मुलचेरा 57 व सिरोंचा तहसील के 95 गांवों का समावेश है।