धान फसलों पर कीड़ों का प्रबंधन करें, कृषि संचालक ने किसानों से किया आह्वान

    गड़चिरोली. पूर्व विदर्भ के जिलों में बीते वर्ष खोड़कीट (कीड़े) का प्रकोप दिखाई दिया था. जिससे शुरू वर्ष में खोड़कीट का प्रबंधन करने के लिए उचित सतर्कता बरतना आवश्यक है. सतर्कता बरतने का आह्वान कृषि विभाग ने किया है.

    इन दिनों अधिकांश खेतों में धान के रोपे लगाए गए हैं. रोपों में कीड़े लगने की संभावना है. इस कीड़े कर फैलाव हवा के साथ होता है. वहीं पतंग कम बारिश अधिक, अधिक सूर्यप्रकाश तथा रात में नमी होने पर बाहर निकलते हैं. अंडे से निकले कीड़े कुछ समय (1 से 2 घंटे) पत्तों के टोक पर रहते हैं. हवा के कारण ऐसे कीड़े सभी खेत परिसर में फैलते हैं. उसकी उचित वृद्धि होने के बाद वह तने तक जाता है. तने में छोटा-सा छेद कर अंदर प्रवेश करती है. 

    तने का अंदरुनी हिस्सा खाते हैं कीड़े

    कीट (कीड़े) फसलों के तने का अंदरूनी हिस्सा खाती हैं. यह करीब 1 सप्ताह तक ही तने में रहती हैं. एक सप्ताह के बाद यह कीट वहां से बाहर आकर दूसरे जगह प्रवेश करती हैं. इस कीट का प्रकोप दिखाई देने पर समय रहते उपाययोजना करना आवश्यक है. अन्यथा उत्पादन में व्यापक गिरावट हो सकती है. जिससे किसान पीला खोड़कीट का प्रकोप दिखाई देने पर समय रहते उपाययोजना करें, ऐसा आह्वान कृषि संचालक विकास पाटिल ने किया है. 

    एकात्मिक कीट प्रबंधन 

    फसलों के सीजन के शुरुआत में यानी बारिश शुरू होते ही कोषावस्था से बाहर निकमले मादी पतंग प्रकाश जाल में आकर्षित कर नष्ट करें, कीट के अंडीपूंज समय-समय पर इकट्टा कर नष्ट करें, कीटग्रस्त पौधे उखाड़ें, इस कीट के सर्वेक्षण हेतु प्रति हेक्टेयर 5 फेरोमेन जाल लगाकर वहां अटके पतंग का निरीक्षण करें.