शराबबंदी के समर्थन में जिले के अनेक गांव आए आगे

  • अबतक 459 गांवों के प्रस्ताव

गडचिरोली. जिले में 1993 में सरकारी शराबबंदी के बाद सैंकडों गांवों ने स्वयं निर्णय लेकर गांव शराबमुक्त किया है। शराबबंदी के जिले को इसका फायदा होने से यह शराबबंदी कायम रखने के लिए जिले के गांव आगे आए है। महाराष्ट्र सरकार ने किसी भी स्थिति में यह शराबबंदी हटाने का विचार न करे, सख्ती से अमलीकरण की मांग गांव गांव से उठ है। 15 अक्टूबर तक जिले के कुल 459 गांवों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर मुख्यमंत्री को प्रेषित किया है।

कुछ राजनितिज्ञों ने नीहित स्वार्थ के लिए ‘चंद्रपुर व गडचिरोली’ जिले की शराबबंदी हटाने का विचार करने  समिति तैयार करने का निर्णय लिया तथा जिले के कुछ जनप्रतिनिधियों ने शरबबंदी हटाने की मांग करने से गांव गांव में रोष निर्माण हुआ है। हजारों महिलाओं ने सरकारी शराबबंदी पर  आधार लेकर अपने प्रयासों से गांव की गैरकानूनी शराब बंद की। जिससे 700 गांव में शराबबंदी हुई है। मात्र शराबबंदी हटाने के राजनितिक हलचलों के चलते शराबबंदी होनेवाले गांवों के महिला, पुरूष अब भी शराबबंदी को बचाने के प्रयास में जुटे है। मुख्यमंत्री तक अपनी भावनाएं पहुंचाकर शराबबंदी कायम रखने का प्रस्ताव भेजा जा रहा है। 

इसमें आरमोरी 6, कुरखेडा 37, कोरची 31, धानोरा 38, गडचिरोली 40, चामोर्शी 19, मुलचेरा 33, एटापल्ली 28, भामरगड 52, अहेरी 25 व सिरोंचा के 77 गांवों का समावेश है। शराबबंदी के समर्थन में फिर से गांवों की वृद्धी होती दिखाई दे रही है।