धान पिसाई का खर्च किसानों का बढता सिरदर्द

  • प्रती बोरा 70 रूपये खर्च
  • आधे उत्पादन से किसानों की बढी चिंता

चामोर्शी. तहसील के धान कटाई व बांधनी का कार्य निपट गया है, अब किसान धान पिसाई के कार्यो की ओर बढे है. बदलता तकनिकीज्ञान स्विकारते हुए किसान परंपरागत पद्धती का उपयोग न करते हुए थ्रेशर मशीन द्वारा धान पिसाई का कार्य कर रहा है. इसके लिए प्रति बोरे 70 रूपये खर्च किसानों को आ रहा है. मात्र इस वर्ष उत्पादन आधे पर आने से पिसाई के बढे दाम किसानों के लिए सिरदर्द बन रहे है. 

इस वर्ष धान फसलों पर कीटों का प्रादुर्भाव अधिक था. जिससे बिते वर्ष की तुलना में इस वर्ष उत्पादन आधे पर आया है. प्रति एकड 8 से 9 बोरे उपज हुई है. ऐसे में थ्रेशर मशीन मालिक बढते किंमतों का विचार करते हुए इस वर्ष प्रति बोरा 70 रूपये दाम ले रहे है. तो कुछ गांवों में प्रति एकड धान फसलों के लिए 1 हजार 100 से 1 हजार 300 रूपये ले रहे है. थ्रेशर मशीन मालिकों को मजदूरों की मजदूरी के रूप में प्रति बोरे 30 से 40 रूपये देना पडता है. मजदूर इस कार्य में सुबह खेतों में जाकर पिसाई का कार्य कर रहे है. जिससे व्यापक मेहनत करनी पडती है. इसके लिए दिनभर में करीब 400 से 500 रूपये मजदूरी मिले इस आंस में यह मजदूर कार्य करते है. पिसाई का कार्य से मजदूर व मालिकों को मौसमी स्वरूप का रोजगार उपलब्ध हुआ है. 

बुआई खर्च निकलना भी मुश्किल

बिते वर्ष की तुलना में 10 से 20 रूपयों से पिसाई खर्च में वृद्धी हुई है. इस वर्ष धान फसलों पर किटों का प्रादुर्भाव अधिक होने से धान का उतारा घटा है. जिससे किसानों को पिसाई व अन्य खर्च देखे तो हाथ में कुछ न आने की बात कहीं जा रही है. किसान बडी आंस से खेतों की ओर देखता है. मात्र धान की खेती फिलहाल बिना भरोसे की होती जा रही है. उपज आयी तो खेती, वर्ना सब मट्टी ऐसी स्थिती कृषि की हुई है. जिससे प्रति वर्ष प्रकृति के अनियमित रूप से उत्पादन में गिरावट देखी जाती है. मात्र किसान प्रति वर्ष आनेवाले संकटों का सामना करते हुए परंपरागत व्यवसाय के रूप में खेती कर रहा है. 

गांव गांव में थ्रेशर मशीन दाखिल 

पिसाई कार्य के लिए दुसरे जिले के थ्रेशर मशीन गांव गांव में दाखिल हुए है. कुछ क्षेत्र में धान का उत्पादन नहीं लिया जाता है. जिससे धान उत्पादन करनेवाले क्षेत्र में प्रति वर्ष थ्रेशर मशीन लेकर मालिक माहभर उस क्षेत्र में निवास करते है. फिलहाल दिन ब दिन थ्रेशर मशीन गांव गांव में दिखाई दे रहे है. इसी मशीन से रब्बी फसलों की भी पिसाई की जाती है. मौसमी स्वरूप में साल में एक बार यह रोजगार मिला है.