farmers
File Photo

  • निसर्ग के प्रकोप से परिवार चलाना हुआ मुश्किल

गडचिरोली. इस वर्ष तो भी अच्छा उत्पादन होगा, इस आंस पर धान फसलों की बुआई करनेवाले किसानों के नसीब में इस वर्ष भी कुछ हाथ नहीं लगा. अतिवृष्टी, बाढ, कीटों का प्रादुर्भाव व बेमौसम बारिश से किसान संकटों में आ चुके है. कीटों के प्रादुर्भाव से धान फसलों का उत्पादन 25 प्रश से कम हुआ. बार बार आनेवाले प्रकृती के चलते किसानों में निराशा छा गई. जिससे इतने से उत्पादन में परिवार का गुजरबसर कैसा चलेगा, ऐसा सवाल किसानों के समक्ष आ रहा है.

इस वर्ष शुरूआत में ही बारिश होने से किसानों ने धान की बुआई की. हालांकी उसके बाद मात्र बारिश ने एक मोड लिया. धान बुआई उचित रूप से होने पर समाधानकारक बारिश नहीं हुई. जिससे अनेक किसानों ने पानी देकर बुआई की. मात्र जिस किसानों की ओर सिंचाई की सुविधा नही थी, उन किसानों को बारिश का इंतजार करना पडा. बडी प्रतीक्षा के बाद बारिश होने से किसानों ने बुआई की. इस वर्ष अच्छा उत्पादन होगा, इस आंस पर किसान होने पर अगस्त माह में जिले में बाढ स्थिती निर्माण हुई. बाढ के चलते नदी तट के धान फसल नष्ट हो गए. जिससे किसानों पर बडा संकटों का पहाड तुट पडा है.

साथ ही धान फसलों पर गादमाशी, कडाकरपा, मावा, तुडतुडा जैसे कीटों ने हमला किया. किसानों ने पैसे उधार लेकर महंगे किटकनाशकों का छिडकाव किया. मात्र कीटों का प्रादुर्भाव कम नहीं हुआ. कीटों से खडे फसल नष्ट हो गए. वही कई किसानों ने तो रोगग्रस्त धान फसलों को आग लगा दी. साथ ही धान कटाई होने के बाद बेमौसम बारिश ने हजेरी लगाई. हजारो हेक्टेअर के धान बारिश में भीग गए. जिससे किसानों में निराशा छा गई. कीटों का प्रादुर्भाव होनेवाले धान के उत्पादन में गिरावट हुई है. जिससे परिवार का गुजरबसर कैसे चलेगा, ऐसा सवाल किसानों के समक्ष निर्माण हुआ है. 

इस वर्ष 25 प्रतिशत भी उत्पन्न नहीं

बेमौसम बारिश से व कृत्रिम बाढ से इस वर्ष किसानों का भारी नुकसान हुआ. साथ ही धान फसलों पर कीटों ने हमला करने से धान का उत्पन्न 25 प्रश भी नहीं हो पाया. जिस किसानों के हर वर्ष 200-250 बोरे धान होते थे, वे इस वर्ष 40-50 बोरे ही हुए है. गरीब किसानों की तो इससे खराब स्थिती है. जिस किसानों की ओर एक से दो एकड खेती है, उन किसानों को 4-5 बोरे धान का उत्पन्न हुआ है. इस वर्ष धान फसलों पर अलग ही ‘वायरस’ फैलने की चर्चा ग्रामीण क्षेत्र में है. खेत में खडे धान फसल इस वायरस के चलते नष्ट हुए. जिससे अनेक किसानों के समक्ष निराशा छा गई है. जिससे किसानों का इस वर्ष का वार्षिक बजेट बिघड चुका है. 25 प्रतिशत से कम उत्पन्न हाथ में आने से किसानों के समक्ष परिवार का जीवनयापन करने प्रश्न उपस्थति हुआ है. अभी तक सरकारी खरीदी केंद्र शुरू न होने से निजी व्यापारियों की ओर धान बेचने के अलावा किसानों के समक्ष विकल्प नही है. इसमें भी किसानों की बडे पैमाने में वित्तीय लुट हो रही है. सरकारी समर्थन मूल्य सहन कर अनेक किसान धान बिक्री कर रहे है. ऐसे हालात में किसान बांधव अपने परिवार का गुजरबसर कैसे करेंगे? यह प्रश्न किसानों को उपस्थित हो रहा है.

सरकारी लाभ से अनेक नुकसानग्रस्त किसान वंचित

इस वर्ष प्रकृति के बाढ से अधिक कृत्रिम बाढ ने किसानों का निवाला छिना. मध्यप्रदेश के संजय सरोवर से अचानक छोडे के पानी से वैनगंगा ने रौद्ररूप धारन किया था. इस बाढ में नदी तट की हजारों हेक्टअर खेत जमीन पानी में डुबी थी. राज्य व केंद्र सरकार ने किसानों को मदद की घोषणा की. केंद्र की टीम ने गडचिरोली जिले में आकर नुकसान का निरीक्षण किया. स्थानिय सरकारी तकनिक ने बाढग्रस्त किसानों की सुचि तैयार की. मात्र इस सुचि में भारी पैमाने में घोटाला होकर उचित लाभार्थीओं को सरकार के लाभ से वंचित रहना पड रहा है. नुकसानग्रस्त किसानों के नाम तलाठी व तहसीलदार के सुचि में है, उनके नाम मात्र बैंक की ओर भेजे हुए सुचि में नहीं है. जिससे अनेक किसान सरकार के लाभ से वंचित रहनेवाले है. तहसील कार्यालय में सुचि देखने के लिए गए अनेक किसानों को किसी भी तरह की जानकारी न देकर वापिस भेजा रहा है. यहा के अधिकारी व कर्मचारी किसानों के साथ असभ्य बर्ताव कर रहे है. जिससे प्रशासन के विरोध में किसानों द्वारा तीव्र रोष व्यक्त हो रहा है.