पेट्रोल-डिझेल के दरवृद्धी से आमजनों को फटका

  • केंद्र सरकार की अनदेखी

चामोर्शी. कोरोना कालावधि में लोग वित्तीय संकट में होने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल के किंमतों में वृद्धी का कारण देते हुए पेट्रोल, डिझेल के निरंतर दरवृद्धी से सभी वस्तू व सेवा महंगे हुए है. इसका फटका आमलोगो को लग रहा है. इस ओर केंद्र सरकार अनदेखी करने की बात आमलोगों द्वारा कहीं जा रही है. 

बिते 8, 9 माह से कोरोना के कारण अनेक लोगों का रोजगार छिन गया है. वहीं अनेकों की नौकरीयां गई है. जिससे व्यापक नुकसान सहते हुए विगत कुछ माह से कच्चे तेल की दरवृद्धी कम होने के बावजूद भी इंधन के दाम निरंतर बढ रहे है. जिससे मालवाहू यातायातवालों ने अपनी सेवा कर में भी वृद्धी की है. इसका परिणाम महंगाई पर हो रहा है. फलस्वरूप आमजलों के जेबों को कैसी लग रही है. केंद्र सरकार ने भी उत्पादन शुल्क में वृद्धी करने से इसका परिणाम भी इंधर दरवृद्धी पर हुआ है. कोरोना कालावधि में लोग वित्तीय संटकों में फंसे है. मात्र सरकार व तेल कंपनियां तेल के दरकटौती का लाभ ग्राहकों को देने के बजाए अपने घर भर रहे है. इंधर दर कटौती न करने से मालवाहू का किराया बए रहा है. बढे महंगाई में जनता को राहत देने के लिए सरकार अंतरराष्ट्रीय दरों के हिसाब से छोटे मोटे बिक्री के दर कम करने की आवश्यकता थी, मात्र वैसा होता दिखाई नहीं दे रहा है. 

दाम कम करने की मांग 

निरंतर इंधन दरवृद्धी के कारण माहवाहू के दर बढे है. एसटी के यात्रा किराए में भी वृद्धी हुई है. इसका फटका आदिवासी, आम लोगों को लग रहा है. यांत्रिकी पद्धती से खेती करने का प्रमाण बढा है. जिससे खेती के लिए टैक्टर का उपयोग बडी मात्रा में बढ रहा है. मात्र खेतों में हल चलाने के दर बढने से किसानों को भी इसका फटका लग रहा है. निजी यात्री वाहनधारकों ने भी दर कम न करने से इसका फटका भी किसानों के साथ आम लोगो को लग रहा है. सरकार इंधन दरवृद्धी नियंत्रण में लाकर सभी जीवनावश्यक वस्तूओं के साथ अन्य वस्तूओं के दाम कम करने में कडे कदम उठाए, ऐसी मांग आम लोगों द्वारा की जा रही है. 

निजी वाहन धारक उठाते है लाभ

गडचिरोली जिले का विचार करने पर पिछडा व आदिवासी बहुल जिले के रूप में राज्य में गिनती होती है. जिले में पहले ही यातायात के साधन कम मात्रा में है. ऐसे में यात्री परिवहन के दर बढने से ग्रामीण क्षेत्र के नागरिकों को यह सफर पुराने लायक नहीं है. फलस्वरूप जिले के दुर्गम क्षेत्र के नागरिक पैदल ही दुरी तय करते है. एसटी समेत निजी यात्री वाहनों का भी किरराया बढने से निजी यात्री वाहनधारक आदिवासी बांधवों के अज्ञानता का लाभ उठाकर लगाए गए दर से अधक किराया लेते है. जिससे यात्रियों को अधिक का वित्तीय भुर्दंड सहना पड रहा है.