दशपर्णी अर्क तैयार करने का प्रात्यक्षिक, तुलशी में तहसील कृषि अधिकारी व आत्मा कार्यालय द्वारा कार्यक्रम

     

     

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    देसाईगंज (सं). तहसील कृषि अधिकारी कार्यालय व कृषि तकनिकी प्रबंधन यंत्रणा (आत्मा) के संयुक्त तत्वावधान से तुलशी में हाल ही में किसानों को दशपर्णी अर्क तैयार करने का प्रात्यक्षिक कर दिखाया गया. किसानों को प्रात्यक्षिक समेत जानकारी देने से दशपर्णी अर्क संदर्भ में जानकारी मिली. 

    दशपर्णी अर्क फसलों के कीटक प्रबंधन के लिए काफी लाभदायक है. इसका उपयोग किसान करने पर दवा छिड़काव खर्च में बचत होगी. दशपर्णी अर्क तैयार करने की पध्दत काफी आसान है. किसान आसानी से अपने घर दशपर्णी अर्क तैयार कर सकता है. इस दशपर्णी अर्क का उपयोग कियान सब्जी फसलों समेत अन्य फसलों के किटक नियंत्रण प्रबंधन के लिए किया जा सकता है. तहसील तंत्र प्रबंधन (आत्मा) महेंद्र दोनाड़कर ने कृषि मित्रों की ओर अझोला व दशपर्णी अर्क तैयार करने का उपक्रम तहसील में शुरू किया है. जिसके तहत तुलशी में तहसील कृषि अधिकारी निलेश गेडाम के मार्गदर्शन में तहसील कृषि पर्यवेक्षक युगेश रणदिवे व तहसील तंत्र प्रबंधन (आत्मा) महेंद्र दोनाड़कर ने प्रात्यक्षिक कर दिखाया. इस समय कृषी मित्र मेघनाथ दुनेदार, उपसरपंच सुरेश तोंड़फोडे, उमाजी दुनेदार, हर्षवर्धन लोणारे, भाऊराव लोणारे, अन्ना मिसार, दिगांबर दुनेदार, मेघराज सुकारे आदीं समेत किसान उपस्थित थे. 

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    दशपर्णी अर्क तैयार करने की पद्धत

    दशपर्णी अर्क तैयार करने के लिए इस तरह के वनस्पतीओं के पत्तों की व गोमूत्र की आवश्यकता होती है. 100 लीटर पानी में यह अर्क तैयार करने के लिए 5 लीटर गोमूत्र, 5 किलो कडूनिम पत्ते, 2 किलो सीताफल के पत्ते, 2 किलो गराड़ी के पत्ते, 2 किलो पपीता के पत्ते, 2 किलो रुई के पत्ते, 2 किलो एरंडी के पत्ते, 2 किलो करंज के पत्ते, 2 किलो टनटनी (भूतगांजा) के पत्ते, 2 किलो सदाफुली के पत्ते, 2 किलो कटउंबर के पत्ते इस प्रमाण में ले. 21 दिनों के बाद 100 लीटर पानी से 70 से 75 लीटर दशपर्णी अर्क तैयार होता है. किसान गोमूत्र समेत उक्त पेड़ों के पत्तों का उपयोग कर दशपर्णी अर्क तैयार करे. एक निश्चित कालावधि के बाद वह फसलों पर छिड़काव करे. जिससे विभिन्न तरह के कीटों का नष्ट किया जा सकता है, ऐसी जानकारी दी गई.