गडचिरोली में मिला दुर्लभ पैंगोलिन

गडचिरोली. वनों में विचरण करनेवाला अतिदुर्लभ पैंगोलिन (खवल्या मांजर) गडचिरोली शहर के सर्वोदय वार्ड में शनिवार को रात 8 बजे के दौरान दिखाई दिया. उसे वनविभाग के कब्जे में देकर जंगलों में छोडा गया. 

गडचिरोली शहर के आरमोरी मार्ग पर से एआरबी ट्रॅवल्स के पिछे के परिसर में खोब्रागडे नामक वृद्ध महिला के घर परिसर के आंगन में दुर्लभ पैंगोलिन दिखाई दिया. उसे देखने के लिए परिसर के नागरिकों ने व्यापक भीड की थी. वनविभाग को जानकारी देने के पश्चात वनाधिकारी व कर्मचारी घटनास्थल पर पहुंचकर दुर्लभ ऐसे इस प्राणी को अपने कब्जे में लिया. उसकी जांच करने के पश्चात रविवार को उसे जंगल में छोडा गया. इस समय गडचिरोली के उपवनसंरक्षक डा. कुमारस्वामी, सहायक वनसंरक्षक सोनल भडके, मानद वन्यजीव रक्षक मिलिंद उमरे, वनपरिक्षेत्र अधिकारी कैलुके, क्षेत्र सहायक जेनेकर, सर्पमित्र अजय कुकडकर, क्रेन्स संस्था के सचिव अंजली कुलमेथे आदि उपस्थित थे. 

पैंगोलिक के वैशिष्ट

पैंगोलिन यह व्यापक दुर्लभ प्राणी होकर उसे मराठी में खवल्या मांजर कहां जता है. वह निशाचर प्राणी है. दिन में वह अपने गहरे बिल में आराम करती है. व रात के दौरान बाहर निकलती है. चिटिया, दीमक उसके खाद्यपदार्थ है. वह अपने चिकट जिभ से उसका सेवन करती है. उसके शरीर पर जाडे खौल होने से उसे खवल्या मांजर भी मराठी में कहां जाता है. किसी भी खतरे का आगाज होने पर वह अपने शरीर को गोल आकार बनाकर स्वयं को छूपा लेते है. यह इनके विशेष वैशिष्ट होते है.