कोरोना से खंडित होगी रावण दहन की  प्रथा

  • सादगी से मनाया जाएगा दशहरा पर्व

गडचिरोली. प्रति वर्ष हिंदू समुदाय द्वारा दहशरा पर्व बडे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। किंतु इस वर्ष कोरोना संक्रमण के चलते प्रशासन ने त्यौहारों के लिए नियमावली लागू करते हुए सभी पर्व सादगी से मनाने की अपील की है। जिसके चलते इस वर्ष धूमधाम से मनाया जानेवाला दशहरा त्यौहार सादगी से मनाया जाएगा और रावण दहन की वर्षो पुरानी परंपरा इस वर्ष खंडित होगी

कोरोना संक्रमण का असर अनेक उत्सव व त्यौहारों पर पडा है।  कोरोना के चलते उत्सव व त्योहार सादगी से मनाने की अपील करते हुए प्रशासन ने नियमावली तैयार की है। जिसके तहत सामाजिक दूरी का पालन यह महत्वपूर्ण नियम है। जिसके चलते उत्सव व त्योहारों का उत्साह कोरोना के चलते लुप्त हो गया है। फिलहाल नवरात्री का पर्व शुरु है और रविवार को दशहरा पर्व है। किंतु इस वर्ष रावण दहन नहीं होगा और सादगी से दशहरा मनाया जाएगा।  

कम होगा मेल मिलाप

दशहरा पर्व पर लोग एक दूसरे के घर में गले मिलकर सोनापत्ता देते है। यह परंपरा काफी पुरानी है किंतु इस वर्ष कोरोना महामारी के चलते एक दूसरे के घर जाकर मुलाकात का दौर भी कम ही रहने की संभावना है। 

आदिवासी करेंगे दशानन का  पूजन

एक ओर जहां देशभर में लंकापति रावण का दहन किया जाता है। वहीं दूसरी ओर आदिवासी समुदाय रावण को भगवान की तरह पूजते है। गडचिरोली जिला आदिवासी बहुल होकर यहां एक ओर रावण का दहन होता आया है, तो आदिवासी समुदाय रावण की पूजा करते है। धानोरा तहसील के परसवाडी व अन्य कुछ दुर्गम गांवों में रावण के मंदिर है वहां दशहरे के दिन दशानन की पूजा होती है। इस वर्ष कोरोना संकट है किंतु सादगीपूर्ण रूप से इस वर्ष भी आदिवासी समाज द्वारा राजा रावण की पूजा की जाने जानकारी है।