अस्पताल में महंगी मशीन बनी शोपीस

    • प्रशिक्षण के बिना भेजी गई लाखों की मशीनें, कर्मचारियों को नहीं है तकनीकी ज्ञान

    कोरची. जिले की आखरी छोर पर बसी कोरची तहसील मुख्यालय स्थित ग्रामीण अस्पताल विभिन्न कारणों को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है. ऐसे में अब तक अस्पताल में लाखों रुपये की मशीनें शोपीस बनी हैं. ये महंगी मशीनें केवल अस्पताल की शोभा बढ़ा रही है. बता दें कि, वरिष्ठों द्वारा लाखों रुपये खर्च कर महंगी मशीनें इस अस्पताल में भेजी गई है.

    लेकिन मशीन चलाने के संदर्भ में प्रशिक्षण नहीं दिया जाने के कारण अस्पताल में आनेवाले मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. जिससे अस्पताल की कार्य प्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं. मरीजों को सुविधा हो, इसलिये अस्पताल में महंगी मशीनें मंगवाई गईं. लेकिन मशीन चलाने के संदर्भ में प्रशिक्षण नहीं दिये जाने से कोरची अस्पताल की यह ये कीमती मशीनें शोपीस बनी है.

    कांग्रेसी नेता मड़ावी पर उपचार नहीं

    कोरची के कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष शामलाल मड़ावी के सीने में दर्द होने के कारण उन्हें कोरची के ग्रामीण अस्पताल में ले जाया गया था. उन्हें सांस लेने में दिक्कत थी. ऐसे में कोरची ग्रामीण अस्पताल में उपलब्ध डी-फेब्रीलेटर मशीन से शॉक देने की सूचना गड़चिरोली के विशेषज्ञों ने कही. लेकिन मशीन शुरू कैसे करें, अधिकारियों के समझ में नहीं आया. उक्त मशीन शुरू नहीं होने से शामलाल मड़ावी को गड़चिरोली के जिला अस्पताल में रेफर किया जा रहा था. गड़चिरोली पहुंचने से पहले ही उनकी मृत्यु हो गयी. 

    कामकाज पर नियंत्रण जरूरी

    कोरची के ग्रामीण अस्पताल पर संपूर्ण तहसील के गांवों की जिम्मेदारी है. इस अस्पताल में विभिन्न गांवों के मरीज आए दिन उपचार के लिए आते हैं. लेकिन अनेक बार समय पर उपचार नहीं मिल पाने के कारण उन्हें उपचार के लिये गड़चिरोली के जिला अस्पताल में रेफर करना पड़ता है. एक तरफ वरिष्ठ स्तर से अस्पताल में लाखों रुपये खर्च कर मशीन भेजी जाती है, तो वहीं दूसरी ओर प्रशिक्षण के अभाव में मशीन का उपयोग नहीं हो पाता. अस्पताल कार्य नियमित और दर्जेदार रूप से शुरू रहे, इसलिये इस अस्पताल के कामकाज पर वरिष्ठों का नियंत्रण जरूरी होने की मांग तहसील के नागरिकों ने की है.