Teak smuggling becomes an easy way for waterways

देश विदेश मे अपार एवं बेश-कीमती सागौन वनों के लिये विख्यात सिरोंचा वन क्षेत्र पर इन दिनों वन तस्करों की नजर पडी हुई है।

  • विभाग के मुस्तैदी के बावजूद तस्करी पर अंकुश नहीं
  • सीमित संसाधन तस्करी रोकने में बाधक

सिरोंचा. देश विदेश मे अपार एवं बेश-कीमती सागौन वनों के लिये विख्यात सिरोंचा वन क्षेत्र पर इन दिनों वन तस्करों की नजर पडी हुई है। जहां घने जंगलों मे मौजूद सागौन के वृक्षों को काटकर तस्कर जलमार्ग मार्ग से तस्करी करने में लगातार सक्रिय है। हालांकि स्थानीय वन महकमा इस पर अंकुश लगाने के लिये निरंतर कार्य कर रहा है। सूचनाओं के आधार पर गोपनीय कार्य योजना बनाकर इस तरह से तस्करी की जाने वाले वन संपदा को जब्त कर रही है। किंतु उनके संसाधन सीमित होने से  जलीय मार्ग से होने वाली तस्करी पर पूर्ण रुप से अंकुश लगाने में बाधा आ रही है।

सिरोंचा वनमंडल के तहत एक सीमित क्षेत्र पर वन परिक्षेत्र बनाकर क्षेत्र के जंगल की निगरानी एवं विकास किया जाता है। जिसके लिये प्रत्येक परिक्षेत्र अधिकारी को नियुक्त कर कार्य योजना के तहत परिक्षेत्र के अन्तर्गत मौजूद वन संपदा की सुरक्षा एवं निगरानी के लिये टीमें बनाकर इस कार्य को अंजाम दिया जाता है। सिरोंचा वनमंडल के तहत आज वर्तमान में बामिनी, झिंगानुर, आसरल्ली, सिरोंचा के रुप मे परिक्षेत्र बनाए गए है। जिनमे से अधिकांश क्षेत्रों का दायरा नदी तटीय इलाकों मे आते है।

साथ ही इन क्षेत्रों मे  सागौन के रुप मे बेश कीमती वन संपदा मौजूद है। इसको लेकर पडोसी राज्यों के वन तस्कर स्थानीय लोगों के माध्यम से तस्करी के रुप में अवैध कारोबार करने के प्रयास मे सक्रिय बना  है। जबकी विभाग सूचनाओं के आधार पर इन्हे दबोचने का कार्य करता आया है। बावजूद इसके तस्र कुच एक संधर्भों पर सीमाओं पर बहने वाले नदी मार्ग से तस्करी में सफल होने के खबरें है। 

वहीं विभाग की कार्य प्रणाली के अनुसार पडोसी तेलंगाना एवं छत्तीसगढ़ राज्य के वन प्रशासन के साथ बैठकें कर संयुक्त कार्रवाई के तहत अंतर्राज्यीय कार्ययोजना बनाती आयी है। इसका कुछ  हद तक फायदा मिलने की बात कही जा रही है। जबकी विभागीय सूत्र बताते है की तस्कर तेलंगाना के नदी तटीय इलाकों मे अपनी पैठ जमाये हुए है। जल मार्ग से तस्करी किये सागौन के लट्टों का वही बोली लगायी जाती है। जहां से स्थानीय स्कश्कर अपनी सागौन को औने-पौने दाम मे बेच कर  अपने अपने स्थानों की ओर लौट आते है।               

जबकी ग्रामीण इलाकों से आ रहे खबरों के मुताबिक सिरोंचा वनमंडल के तहत विशेषकर वन तश्कर गांव पातागुडम , सोमनुर, गुम्मलकोंडा, चिटूर के अलावा झिंगानुर क्षेत्र के सागौन के जंगलों से वन संपदा का तस्करी को सीमाओं पर बहने वाले नदियों के माध्यम से तस्करी को अंजाम दे रहे है। यह भी कहा जा रहा है की वनमंडल मे पूर्व के अपेक्षा सागौन में कमी आई है। इसका प्रमुख वजह तस्करी को बताया जा रहा है। इसकी सत्यता तौ जिम्मेदार विभाग ही जानें।                                                         

वहीं विभाग के सूत्रों की माने तो पूर्व के वर्षों के तुलना में वन तस्करी में कमी आयी है। मगर हाल के वर्षों मे संसाधनो की कमी, बजट की कमी के चलते निगरानी एवं वन क्षेत्रों के गस्त मे बाधाएं उत्पन्न हो रही है। विशेषकर जलीय मार्गों पर गस्त के लिये दी गयी बोटों के रख रखाव एवं उनके संचालन के लिये मेन पावर की कमी , साथ क्षेत्र में घने जंगलों में असुरक्षा की भावना , वन्य जीवों से खतरा आदि जैसी समस्याएं बनी है। इसके बावजूद मौजूदा वन अमला सीमित संसाधनों का अधिकतम उपयोग कर अपने कार्य कुशलता के बलबूते बेहतर परिणाम देने का प्रयास कर रहा है।