Crop Insurance

चामोर्शी. अगस्त माह में आए कृत्रिम बाढ के कारण बडे पैमाने पर धान की खेती नुकसान हुआ है। कोरोना संक्रमण की वजह से जिले भर में चिंता बढी है। तहसील के करीब 11 हजार 426 किसानों ने अपनी फसलों का बीमा किया है। इसलिए इन नुकसानग्रस्त किसानों को प्रधानमंत्री  फसल बीमा योजना लागू कर तुरंत नुकसान भरपाई देने की मांग किसानों ने की है।

तहसील में 34 हजार खेतजमिन पर खरीफ सीजन में धान फसलों की बुआई की है। जिसके अनुसार तहसील में 4 हजार 951 किसानों के खेत जमीन के 3 हजार 913 हेक्टेयर पर की फसल बर्बाद हो गई। इन किसानों का बुआई तक का खर्च नहीं निकलने वाला है। फसल बर्बाद होने से जीवन यापन कैसे होगा यह चिंता उन्हे सताने लगी है।  हर वर्ष किसान खेतों के फसल बीमा निकाले है। किंतु फसलों का नुकसान होने के बावजूद भी  मुआवजा नहीं मिलने से किसानों को आधार देनेवाली प्रधानमंत्री फसल बीमा येाजना लागू करने की आवश्यकता है।

किसान प्रति वर्ष प्रती हेक्टेयर  668 रुपये भरकर खेतों का फसल बीमा निकालते है। इसके लिए  ईफको टोकियो, जनरल इन्शुरन्स कं. लि. को बीमा जिम्मेदारी दी है। जिससे धान उत्पादक 10 हजार 864 व कपास उत्पादक 562 किसानों ने वर्ष 2020-21 इस शुरू वर्ष में फसल बीमा निकाला है। फिलहाल धान फसलों की स्थिति बदतर है। कृषि, पंचायत समिति, तहसील, प्रशासन के मार्फत नुकसनग्रस्त खेतों के सर्वेक्षण हुए है। गतवर्ष की तुलना में इस वर्ष कम बारिश हुई है। जिससे किसानों को आधार देनेवाली प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू कर नुकसान ग्रस्त किसानों को मदद घोषित करने की मांग की जा रही है।

फसल बीमा के निकष

प्रतिकूल मौसम के चलते  बुआई, रोपाई, बीजों के न उगने, सीजन के प्रतिकूल परस्थिति में हुए नुकसान, फसल बुआई से फसले निकालने के कालावधि तक फसलों के उत्पादन में आनेवाली कमी, स्थानीय प्राकृतिक  आपदा के साथ विभिन्न निकष लगाकर  प्रधानमंत्री फसल बीमा का लाभ दिया जाता है। तहसील के करीब उक्त निकष अंतर्गत तहसील के किसानों को तत्काल फसल बीमा  लाभ देने की मांग किसानों ने की है।