Tribals will be able to build houses in the forest area

अनुसूचित जनजाति तथा अन्य परंपरागत वननिवासी परिवारों को उनके निवास के समीप वनक्षेत्र में मकान निर्माण के भूमि उपलब्ध कराने के संदर्भ में राज्यपाल ने अधिसूचना जारी की है।

  • राज्यपाल ने जारी की अधिसूचना 

गडचिरोली. अनुसूचित जनजाति तथा अन्य परंपरागत वननिवासी परिवारों को उनके निवास के समीप वनक्षेत्र में मकान निर्माण के भूमि उपलब्ध कराने के संदर्भ में राज्यपाल ने अधिसूचना जारी की है। इससे पूर्व अनुसूचित जनजाति व अन्य परंपरागत वन निवासी अधिनियम 2006 के अनुसार विभिन्न 13 प्रकार के बातों के लिए आदिवासियों को वनजमीन उपलब्ध कराई जा रही थी। मात्र मकान निर्माण का उल्लेख नहीं था। राज्यपाल कोश्यारी की अधिसूचना से वननिवासी तथा अनुसूचित जनजाति के नागरिकों को राहत मिली है।

राज्य के गडचिरोली, नंदूरबार, पालघर यह जिले प्रमुखता से अनुसूचित जनजाति बहुल क्षेत्र है। राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी ने राज्य के उक्त जिलों का दौरा किया था। इसमें 18 दिसंबर 2019 को गडचिरोली जिले को भी भेंट दी थी। इसदौरान उन्हे कुछ अनुसूचित जनजाति व वननिवासी परिवार अनुसूचित क्षेत्र के उनके मुल बस्तीस्थान में वूध्दि हुए परिवार के लिए जगह उपलब्ध नहीं होने से अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने की बात सामने आई।  अनुसूचित जनजाति व अन्य परंपरागत वननिवासी अधिनयम 2006 अनुसार सरकार विभिन्न 13 तरह के बातों के लिए आदिवासी व परंपरागत वननिवासियों के लिए जमीन उपलब्ध करा सकती है। मात्र उसमें मकान निर्माण का उल्लेख नहीं था। इसलिए राज्यपाल से जमीन उपलब्ध कराने की मांग की गई। 

इस मांग के अनुसार राज्यपाल ने अनुसूचित जनजाति व अन्य परंपरागत वननिवासी अधिनयम 2006 में बदलाव कर 23 सितंबर 2020 को संविधान के पांचवे अनुसूचित के परिच्छेद 5, उपपरिच्छेद 1 अंतर्गत प्राप्त अधिकार का उपयोग कर राज्यपाल ने अधिसूचना जारी की है। अनुसूचित जनजाति का व्यक्ति या परंपरागत वननिवासी यह उक्त गांव में रहना अनिवार्य है. ऐसे व्यक्ति घर के लिए जमीन उपलब्ध कराने का प्रावधान इस अधिसूचना द्वारा किया गया है। इससे अनुसूचित जनजाति के लोगों को राहत मिलेगी।