There should be only one policy on lockdown

  • छोटे व्यवसाइयों को सरकार से वित्तीय मदद की आस

गड़चिरोली. आगामी 1 जुलाई से राज्य सरकार ने लॉकडाउन में कुछ मात्रा में शिथिलता मिलने के संकेत मिल रहे है. जिससे जिले के व्यवसाइयों में आनंद का वातावरण है. जिले का कारभार सुव्यवस्थित होने की अपेक्षा व्यक्त की जा रही है. कोरोना प्रभाव कालावधि के दौरान घोषित लॉकडाउन के कारण जिले के छोटे व्यवसायी व्यापक संकटों में घिरे हैं. जिससे उन्हें प्रोत्साहन देने के लिए राज्य सरकार वित्तीय सहायता दें, यह अपेक्षा भी व्यक्त की जा रही है. 

छोटे व्यवसाइयों पर भारी संकट
जिले के दिहाड़ी मजदूर, कामगार व्यवसाइयों को लॉकडाउन का सर्वाधिक फटका लगा है. लॉकडाउन कालावधि में व्यवसाय ठप होने से नितदिन के मजदूरी पर घर का चूल्हा जलाने वाले लोगों के हाल बेहाल हुए हैं. सलून, चाय टपरी, जिम, सिनेमागृह, होटेल, पानटपरी, दूकानदार आदि समेत अन्य छोटे व्यवसाइयों को 3 माह के कालावधि में कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. कई छोटे व्यवसायिक किराए से दूकान लेकर व्यवसाय शुरू किया था. लॉकडाउन के कारण कमाई का जरियां ही बंद होने से किराया कैसे भरें. यह गंभीर प्रश्न उनके समक्ष निर्माण हुआ है. 

राज्य सरकार ने 1 जुलाई से लॉकडाउन में शिथिलता प्रदान करने का निर्णय की चर्चा है. जिससे जिले के आम लोगों के साथ ही व्यवसाइयों की निगाहें सरकार पर टिकी है. खासकर सलून, पार्लर व्यवसाइयों को कोरोना आचारसंहिता बनाकर आस्थापना शुरू करने की अनुमति दें, छोटे व्यवसाइयों को कुछ मात्रा में कर्ज उपलब्ध कराएं, इन व्यवसाइयों को मदद के स्वरूप में वित्तीय सहायता कर बिजली बिल माफ करें. विगत 3 माह से धार्मिक कार्यक्रम भी ठप होने से मंदिरों में विरानी छायी है. जिससे सरकार कुछ शर्तों के आधार पर श्रद्धालुओं के लिए मंदिर शुरू करने की अनुमति देने की मांग श्रद्धालुओं के साथ ही मंदिर प्रबंधन द्वारा किया जा रहा है. 

दूकानों का समयावधि बढ़ाएं : चन्नावार
गड़चिरोली जिले में प्रशासन द्वारा सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक ही दूकानें शुरू रखने की अनुमति दी है. जिससे दूकानदारों को काफी मशक्कत का सामना करना पड़ता है. ऐसे में दूकानों का समयावधि बढ़ाना आवश्यक है. यही व्यापारियों की सरकार व प्रशासन से अपेक्षा भी है. यह बात गड़चिरोली शहर व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष रवी चन्नावार ने कहा.

नाभिक समाज को दें राहत : वनस्कर
लॉकडाउन के चलते विगत 3 माह से सलून दूकानें बंद है. जिससे नाभिक समाज को वित्तीय संकटों का सामना करना पड़ रहा है. आगामी दिनों में सरकार द्वारा लॉकडाउन में शिथिलता प्रदान करने की बात कही जा रही है. ऐसे में परंपरागत व्यवसाय पर निर्भर नाभिक समाज को सलून व्यवसाय शुरू करने की अनुमति देना आवश्यक है.