353C highway, Sironcha, gadchiroli

  • न हुआ सुधार, न बदली तस्वीर

सिरोंचा. तहसील को जिला मुख्यालय एवं विधानसभा मुख्यालय से जोडनेवाले एक मात्र राजमार्ग 353 सी इन दिनों अपनी अंतिम अवस्था से गुजर रहा है। इस सड़क को विधानसभा की जीवन रेखा भी कहा जाता है। मगर अब यह अपने अस्तित्व को लेकर चर्चा में है। सड़क के बारे मे कहां जाए तो इस सड़क पर चलते समय यात्रियों एवं वाहन चालकों को गड्ढों के स्थान पर सड़क को खोजना पड़ रहा है। जबकी हाल ही के वर्ष में करोडों कि लागत से इसकी मरम्मत की गई है। जो कि सफेद हाथी साबित हुई है। सड़क कि कहा मरम्मत हुई यह तो जिम्मेदार विभाग ही बता सकता है।

इस सड़क के मरम्मत के नाम पर सियासी दौर भी जोरों पर है। जिले के प्रत्येक राजनितिक दल के नुमाइंदे इस पर खुब सियासत करते दिखाई दे रहे है। किसी ने गड्ढों की मरम्मत के लिए अपनी आवाज बुलंद की, तो किसी ने तय सीमा में मरम्मत नहीं करने पर निर्वाचित जन प्रतिनिधयों के घरों कें सामने भी आंदोलन किया। इसके बावजूद इसके लिए जिम्मेदारों के कानों मे जूं तक नही रेंगी है। सड़क की दयनीय दशा को देखते हुए यात्री अब इस राजमार्ग कि तुलना कमर तोड़ सड़क के नाम सें करने लगे है। जबकी राजमार्ग 63 के बन जाने से इस सड़क पर यातायात में कई गुना इजाफा हुआ है।

एक नजर राजमार्ग पर हुए सियासत पर

राजमार्ग 353 सी को लेकर सियासत भी जोरों पर हुई है।  विधानसभा व लोकसभा चुनाव के बाद स्थानीय विधायक तथा सांसद ने सिरोंचा तहसील का दौरा किया। उस समय सडक की स्थिति को लेकर सडक के यथाशीघ्र मरम्मत कराने का वचन दिया था। वहीं आविस ने भी आवेदन के माध्यम से राजमार्ग के मरम्मत का अल्टीमेटम देते हुए तय सीमा मे मरम्मत नहीं करने पर स्थानीय जन प्रतिनिधियों विधायक एवं सांसद के घरों के सामने गड्ढे खोदो आंदोलन की चेतावनी दी थी। जबकी वर्तमान अघाडी सरकार मे प्रमुख सत्तारूढ़ दल शिवसेना के जिला पदाधिकारियों ने भी राजमार्ग के  दुर्दशा को लेकर मुखर हो चुके है। इसके अलावा युवक कांग्रेस के पदाधिकारियों ने भी इसको लेकर आवेदन सौंपा है। उन्होंने भी जिला कलेक्टर से भेंट कर जांच की मांग की। जानकारी के मुताबिक पूर्व के माह मे राज मार्ग 353 सी पर मरम्मत का कार्य किया गया है। मगर वह सफेद हाथी साबित हुआ है। किए गए मरम्मत कार्य को आसमान खा गई या धरती निगल गई यह तो सबंधित विभाग ही जाने।    

राजमार्ग 353 सी पड़ा बदहाल

वर्तमान समय पर सड़क के बारे मे कहा जाए तो यह सड़क कमर तोड़ सड़क के नाम से जाना जाने लगा है। जहां राज मार्ग पर डामर कि चिकनी सड़क के मुकाबले गाड्डों वाला सड़क ज्यादा नजर आती है। जबकी तहसील निवासिसयों को जिसमें आम एवं खास के अलावा सरकारी अधिकारी कर्मचारियों को विधानसभा मुख्यालय के अलावा जिला मुख्यालय पहुंचने का रास्ता यही है। सड़क कि दुर्दशा के चलते जिला मुख्यालय यानी 220 किलोमीटर की दूरी को तय करने मे 7 से 8 घंटो का समय लगता है। इसमे समय के अलावा शारीरिक पीडा उपहार के रुप मे मिलने लगी है। दुपहिया वाहन धारकों का न पूछे उन्हे इस राज मार्ग पर सफर के बाद जरुरत के मुताबिक बेड रेस्ट अनिवार्य हो गया है।

अहेरी के एक युवक ने बटोरी सुर्खियां

हाल ही के दिनों मे राजमार्ग 353 सी की दुर्दशा से आहत एक युवक ने आवाज बुलंद की थी। युवक के बारे मे बताया गया कि वह अहेरी का निवासी है। उसने राजमार्ग के दुर्दशा को लेकर आलापल्ली के समीप सड़क पर खड़े रहकर स्थनीय जन प्रतिनिधियों को चुनौति पेश करते हुए राज मार्ग के दुर्दशा पर जोरदार चुटकी ली  जो कि सोशल मीडिया पर खुब सुर्खियां बटोर चुका है। जबकी तहसील के लोगों में राज मार्ग कि दुदर्शा को लेकर जबरदस्त नाराजगी देखी है। इसका असर आगामी पंचायत चुनावों पर पडने की संभावना है।