canal bridge, palandur

    अहेरी. भले ही सरकार मेक इन इंडिया का नारा देकर शहरी और ग्रामीण क्षेत्र का विकास करने की बात कह रही है. लेकिन राज्य के आखरी छोर पर बसे आदिवासी बहुल, नक्सल प्रभावित और दुर्गम जिले के रूप में पहचाने जानेवाले गड़चिरोली जिले के ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्र में आज भी विकास की गंगा नहीं पहुंप पायी है. इन क्षेत्र के लोग आज भी विकास की बांट जोहते नजर आ रहे है.

    ऐसा ही एक मामला अहेरी तहसील मुख्यालय से 45 किमी दुरी पर बसे येरमनार गांव में सामने आया है. जहां आगादी के 7 दशक बाद भी गांव समीपस्थ बहनेवाले नाले पर पुलिया का निर्माण नहीं किया गया है. जिससे प्रति वर्ष बरसात के दिनों में इस गांव का तहसील मुख्यालय से संपर्क टूट जाता है. ऐसी गंभीर स्थिति होते हुए भी इस गांव के विकास की ओर न प्रशासन ध्यान दिया और न ही जनप्रतिनिधि संज्ञान ले रहे है. जिससे यह गांव आज भी विकास से कोसो दूर है.

    पहली ही बारिश में बह गया रपटा

    नाले पर पुलिया नहीं होने कारण येरमनार समेत परिसर के 6 गांवों के नागरिकों का बरसात के दिनों में संपर्क टूट जाता था. जिससे इस क्षेत्र के नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था. इस गंभीर समस्या का संज्ञान लेते हुए 3 वर्ष पहले भुमकाल संगठन ने उक्त नाले पर नागरिकों की सहायता से श्रमदान कर रपटा तैयार किया गया. जिससे परिसर के नागरिकों को बड़ी राहत मिली थी.

    मात्र पहली ही बारिश के पानी से नाले पर बाढ़ की स्थिति निर्माण होकर रपटा पानी में बह गया. जिसके बाद दुबारा नागरिकों को अपनी जान मुठ्ठी में लेकर नाला पार करना पड़ रहा है. इस संदर्भ में अनेक बार परिसर के गांवों के  नागरिकों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का ध्यानाकर्षण कराया. लेकिन किसी ने भी ग्रामीणों को होनेवाली परेशानियों की ओर ध्यान नहीं दिया. जिससे नागरिकों में तीव्र नाराजगी व्यक्त की जा रही है.

    बरसात में चार महिनों तक टूट जाता है 6 गांवों का संपर्क

    आजादी सात दशक बाद भी येरमनार नाले पर पुलिया का निर्माण नहीं होने के कारण पिछले अनेक वर्षो से येरमनार समेत परिसर के छह गांवों को नकरीय यातना भुगतनी पड़ रही है. इस क्षेत्र के येरमनार, कोरेपल्ली, कवठराम, गुर्जा खु, गुर्जा बु और मीचगुंटा आदि गांवों के नागरिकों का बरसात के दिनों में करीब चार माह तक तहसील मुख्यालय से संपर्क टूट जाता है.

    बता दे कि, संबंधित गांवों में करीब 200 घरों की बस्ती होकर आसपास 1 हजार के करीब जनसंख्या है. बरसात के दिनों में नाले में पानी रहने के कारण इन गांवों के नागरिकों को अपनी जान मुठ्ठी में लेकर नाला पार करना पड़ता है. साथ ही इस क्षेत्र के स्कूली छात्रों को शिक्षा से वंचित रहना पड़ता है.

    इस क्षेत्र में नहीं दिखाई देते कर्मचारी

    इस क्षेत्र के लोगों का कहना है कि, क्षेत्र के लिये विकास के लिये नाला बाधा बना हुआ है. नाले पर पुलिया हीं नहीं होने के कारण इस परिसर की समस्या जानने के लिये प्रशासन के अधिकारी और कर्मचारी नहीं पहुंच पाते है. हालांकि दुर्गम क्षेत्र में स्वास्थ्य कर्मचारी, शिक्षक, बिजली कर्मिचारी, राजस्व कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है. लेकिन इस परिसर में केवल तीन-चार माह में एक भी सरकारी कर्मचारी नजर आते है.

    जिसके कारण परिसर के नागरिकों को अपनी समस्या रखने के लिये सरकारी कर्मचारी की गांव में आने की प्रतिक्षा करनी पड़ती है. लेकिन समय पर कर्मचारी नहीं पहुंचने के कारण इस क्षेत्र के लोगों की समस्याएं हल होते नहीं दिखाई दे रही है.