stork birds

  • एक साथ 18-23 की संख्या में देखे गए

गोंदिया. सारस पंछी अभी विलुप्तप्राय होते जा रहे हैं. सारस उड़ने वाले पंछियों में सबसे ऊंचा पक्षी माना जाता है. वह धान के खेतों, तालाबों व नदियों में विचरण करता है. यह उनका अधिवास क्षेत्र है. माना जाता है की जिस खेत में सारस पंछी विचरण करता है, उसका बसेरा रहता है, वह खेत हमेशा खुशहाल व समृद्ध रहते हैं. किसी भी तरह के कीटों का प्रकोप वहां नहीं होता है. वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो यह बात सच भी साबित होती है. गोंदिया-बालाघाट की सीमा पर दर्ज हुए समूह, सम्मलेन, (कॉग्रिगेशन) में लगभग 18-23 सारस पंछी एकसाथ दिखे. यह पंछी कुछ दिन कुछ हप्ते एक साथ रहकर नए-नए ठिकानों में जाकर इस क्षेत्र का मुआयना करते हैं,जिसमें आगे जाकर अपने जोड़ीदार के साथ अपना इलाका चुन सके.

बालाघाट व गोंदिया जिले की सीमा पर डेरा

एकत्रित हुए यह पंछी अधिकांश युवा है. जिसमें पिछले वर्ष व पिछले के पिछले वर्ष के बच्चे जो अभी युवा हुए है. इस वर्ष बारिश में गोंदिया व बालाघाट जिले में कुछ निमवयस्क सारस के समूह विचरण करते हुए पाए गए थे. कई ऐसे वयस्क सारस जोड़े हैं जिनका इलाका दोनों जिलों की सीमा में है. युवा सारस कई बार एक साथ आकर अपना सामाजिक रिश्ता मजबूत कर अपना साथी चुनते हैं. यह रोमांचित कर देने वाली सुखद घटना देखना और दर्ज करना अपने आप में ही अलौकिक बात है. जिसमें हमें सारस पक्षी के जीवन सफर और शैली के बारे में समझने और अभ्यास करने का अवसर मिलता है. इस समूह-सम्मलेन की घटना की जानकारी सेवा संस्था के स्वयंसेवी सदस्यों से प्राप्त हुई. 

वनविभाग रख रहा निगरानी

आगे वन मंडल बालाघाट व गोंदिया के साथ मिलकर उन पर निगरानी कर सारस पंछियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें उस दिशा में कार्य शुरू है. 1990 -2000 के दशक में सारस पंछी बालाघाट-गोंदिया से विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गए थे. धान के खेतों में रहने वाला यह पंछी एक समय विलुप्त होने जा रहा था, हरित क्रांति की शुरुआत होने पर खेतों में बड़ी मात्रा में कीटकनाशक, रासायनिक खाद का उपयोग होने से सारस पर उसका गहरा असर पंहुचा और उनकी संख्या कम होने लगी. सारस हमेशा जोड़े में रहता है, वह एकबार जीवनसाथी चुनकर ताउम्र उसी के साथ रहता है.

घोंसला बनाते समय सारस अपना घोंसला कई बार धान के खेत में बनाता है. किसान कई बार फसल के नुकसान के डर से घोंसला फेंक देते है. जिससे सारस की संख्या बढ़ नहीं पा रही. अधिवास नष्ट होने व जैविविधता दूषित होने से भी सारस व अन्य जीवों पर गहरा असर हो रहा है. वर्ष में कुछ सारस पंछी बिजली के तारों से टकराकर घटनाओं में मृत हो जाते है. 2 दशक से वन्यजीव क्षेत्र में कार्य कर रहे है. सेवा संस्था विशेषत: गोंदिया व बालाघाट जिले में कार्य करने के साथ ही सारस संरक्षण के कार्य दोनों जिलों में हो रहे हैं. 

विलुप्त हो रही संख्या

एक समय विलुप्त हो रहे सारस पक्षी की संख्या महाराष्ट्र में सिर्फ गोंदिया जिले में ही पाई जाती है, जो 2004-05 में सिर्फ 4 सारस ही बचे थे. वर्ष 2005 से गोंदिया जिले में सारस संरक्षण के कार्य सुरनिकट ही मध्यप्रदेश का बालाघाट जिला जो गोंदिया से भौगोलिक रूप से जुड़ा है. वहां भी 1980-1990 के दशक के पहले सारस बड़ी संख्या में थे, लेकिन बालाघाट जिले के सारस भी विलुप्ति की ओर थे. बालाघाट जिले में एक समय सारस की संख्या सिर्फ 12-15 ही थी आज वह अथक प्रयासों से 52-55 तक पहुंच गई. 2020 की सारस गणना में बालाघाट जिले में 52-55 सारस की गणना हुई. जिले में 43-45 सारस पंछियों की गणना की गई. वन मंडल व वन विभाग के साथ मिलकर भी कार्य किए जा रहे हैं. हर वर्ष संस्था व वन विभाग के साथ मिलकर वार्षिक सारस पक्षी गणना दोनों जिलों में बालाघाट -गोंदिया में जून माह में की जाती है. वर्ष में सेवा संस्था द्वारा सारस मित्र सम्मलेन जैसे आयोजन कर किसानों व  सारस मित्रों को सम्मानित कर उनका हौंसला बढ़ाया जाता है.   

टीम सेवा सेवा संस्था के पदाधिकारी, सहयोगी व किसानों का योगदान महत्व पूर्ण है. जिसमें संस्था अध्यक्ष सावन बहेकार के साथ ही सहयोगी अविजित परिहार, चेतन जसानी, अभय कोचर, अंकित ठाकुर, शशांक लाडेकर, कन्हैया उदापुरे, दुश्यंत आकरे, विशाल कटरे, तृपराज राणा, रवि पालेवार, बसंत बोपचे, पप्पु बिसेन, बबलू चुटे, निशांत देशमुख, सिकंदर मिश्रा,  स्वयंसेवी व स्थानीय किसान भी इस कार्य में सहयोग कर रहे हैं.