ईंधन के बढ़ते दामों से सभी त्रस्त, कीमतें कम करने के उपाय लागू करना भी मुश्किल

    गोंदिया (का). दिनोंदिन बढ़ रही पेट्रोल-डीजल की दर से सर्वसामान्य नागरिकों को पसीना छूट रहा है. अब 100 रु. पार करते हुए पेट्रोल की कीमत प्रति लीटर 108 पर पहुंच गई है. इन बढ़ती कीमतों से मध्य वर्ग परेशान है. पेट्रोल व डीजल की बढ़ती कीमत नागरिकों को रुला रही है. पेट्रोल के साथ महंगाई बढ़ने से नागरिकों की जेब पर असर हो रहा है.

    पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है. जिसे लेकर अनेक राजनीतिक पार्टियां आंदोलन कर रही हैं. जिसे कंट्रोल में करने विशेषज्ञ उपाय बताते हैं लेकिन यह उपाय आसान नहीं है. पहला उपाय केंद्र व राज्य सरकार दोनों को खनिज तेल पर लगाई एक्साइज ड्यूटी कम करना होगा. लेकिन दोनों सरकारें ऐसा नहीं कर सकतीं.

    दूसरा उपाय है कि सब्सिडी दी जाए, लेकिन सरकार की विचारधारा के विरुद्ध है. अगर पेट्रोल की कीमतें कम हुईं तो केवल गरीबों को फायदा होगा ऐसा नहीं है. संपन्न वर्गों को भी इसका फायदा होगा. लोगों को राहत देनी है तो एक विकल्प ऐसा भी है कि खनिज तेल को जीएसटी के अंतर्गत लाया जाए. लेकिन यह राजनीतिक मुद्दा है. देश में पहली बार पेट्रोल-डीजल के दर 100 रु. के ऊपर पहुंची है. अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार के कच्चे तेल की कीमत का अनुमान लिया तो और महंगे हो सकते हैं. लेकिन इससे बाहर निकलना है तो हमें तेल व डीजल पर होने वाली निर्भरता धीरे-धीरे कम करनी होगी.

    महंगाई नियंत्रण में नहीं होने से नागरिकों में रोष

    दिनोंदिन बढ़ते पेट्रोल-डीजल के दर से आम नागरिक पूरी तरह से परेशान हैं. पहले ही कोरोना की पार्श्वभूमि पर किए गए लाकडाउन से अनेक लोगों के रोजगार छिन गए हैं. रोजगार न मिलने से अनेकों पर भूखे रहने की नौबत आ गई है. ऐसे में महंगाई आसमान छू रही है. जिससे आम नागरिक परेशान हैं. पेट्रोल डीजल के साथ साथ सिलेंडर, जीवनावश्यक वस्तुओं के दाम भी बढ़ गए हैं. लेकिन सरकार का इस पर कोई भी नियंत्रण नहीं होने से नागरिकों में रोष निर्माण हो रहा है.