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गोंदिया. कोरोना का प्रभाव हर एक जिले में कम अधिक प्रमाण में है. ऐसी स्थिति में शाला शुरू करना चुनौती बना है. बावजूद विद्यार्थियों के स्वास्थ्य व शिक्षण विचार में लेकर शिक्षण विभाग ने 9वीं से 12वीं कक्षा शुरू करने का निर्णय लिया है. इसमें सभी जिम्मेदारी शाला प्रशासन पर डाल दी गई है. जिससे शिक्षकों में नाराजगी है. कई स्थानों पर विद्यार्थी व पीरिएड को लेकर भ्रम की स्थिति है. शाला शुरू करने के पूर्व शिक्षकों की कोरोना जांच कराने का निर्णय लिया गया था. इसके अनुसार मंगलवार से शिक्षकों की आरटीपीसीआर जांच की शुरू आत हुई है.

गाइड लाइन का कड़ाई से पालन जरूरी

23 नवंबर से शाला शुरू करते समय केंद्र व राज्य सरकार की गाइड लाइन का पालन कर अध्ययन व अध्यापन की प्रक्रिया शुरू होगी. केवल 4 घंटे शाला लगेगी. स्थानीय प्रशासन शाला शुरू करने के लिए उचित खबरदारी लेने की सूचना शिक्षण विभाग ने की है. नियमों का पालन हो रहा है या नहीं इसकी जांच संबंधित अधिकारी करेंगे. शाला शुरू करने के पूर्व शिक्षकों के स्वास्थ्य जांच की शुरुआत हो गई है. इसमें स्थानीय प्रशासन, मुख्याध्यापक, शिक्षक, पालक, शाला समिति व सरकार की सामुदायिक जिम्मेदारी से 1 दिन बाद विद्यार्थियों को शिक्षा दी जाएगी. शिक्षकों को अध्यापन व विद्यार्थियों को अध्ययन करते समय मास्क पहनना बंधनकारक है. केवल गणित, विज्ञान व अंग्रेजी इन विषयों की शिक्षा दी जाएगी. शिक्षकों की उपस्थिति 50 प्रश बंधनकारक रहेगी. 

पालकों से लेनी होगी लिखित सहमति

गोंदिया जिले के आदिवासी नक्सल प्रभावित व ग्रामीण परिसर की शालाओं में शिक्षा लेने वाले विद्यार्थी अब भी ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली से कोसो दूर हैं. उन्हें ऑनलाइन शिक्षा के प्रवाह में लाने के लिए शिक्षक व शिक्षण विभाग के समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. शासन ने शाला शुरू करने संबंधी लिया निर्णय स्वागत योग्य है, फिर भी शाला शुरू करने के लिए दर्ज मार्गदर्शक सूचनाओं में शाला शुरू करने की जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं हो रही है. विद्यार्थियों की संख्या 50 प्रश दर्ज की गई है. एक कक्षा में अंतर बनाकर 15 विद्यार्थी बैठेंगे. एक कक्षा में 90 पटसंख्या होने पर एक कक्षा को 6 भागों में विभाजित होंगे. इसमें 3 कक्षा प्रत्यक्ष व 3 कक्षा में ऑनलाइन शिक्षा होगी. इतना ही नहीं पालकों से सहमति पत्र लेकर कक्षा शुरू करने की बात कही गई है, लेकिन पालक सहमति पत्र देने की तैयारी में नहीं है. इसमें सभी जिम्मेदारी मुख्याध्यापक व शिक्षकों ने स्वीकार करनी चाहिए क्या? ऐसा सवाल शिक्षकों ने उपस्थित किया है. शाला में स्वच्छता, जंतुरहित सुविधा, कोरोना विषयक उपाय योजना अंतर्गत शिक्षकों के लिए आरटीपीसीआर जांच अनिवार्य की गई है.

नहीं मिला वेतनोत्तर अनुदान : नाकाडे

कोविड वायरस प्रतिबंधात्मक उपाय योजना क्रियान्वित करने आवश्यक भौतिक सुविधा उपलब्ध कराने शासन को शालाओं को वेतनोत्तर अनुदान देना जरूरी है. गए 2 वर्षों से शालाओं को अनुदान नहीं दिया गया है. जिससे मुख्याध्यापक व्यवस्था कैसे करें, ऐसा सवाल खड़ा हो गया है. शाला शुरू करने की जिम्मेदारी शासन ने स्वीकार नहीं कर मुख्याध्यापक, शिक्षक व पालकों पर सौंप दी है. जिससे भ्रम की स्थिति निर्मित हो गई है. ऐसा आरोप शिक्षक भारती संगठन अर्जुनी मोरगांव के तहसील अध्यक्ष प्रा.दिनेश नाकाडे ने लगाया है.