Construction workers
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    • नागरिकों के सामने आर्थिक संकट

    गोंदिया. कोरोना महामारी के चलते लागू किए गए लाकडाउन की वजह से तथा बढ़ती कीमतों से निर्माण कार्यों पर विपरीत प्रभाव पड़ा है़ दूकानें पहले की तरह न खुलने से लोगों ने अपने निर्माण कार्य रोक दिए हैं, जिसका असर लोहा, सीमेंट की दूकानों के साथ ही मजदूरों पर पड़ा है़ जैसे–तैसे कुछ लोगों ने निर्माण कार्य शुरू किया ही था कि सीमेंट के भाव आसमान छूने लगे है़ं  एक माह में 40 रुपए प्रति बोरी तक के भाव बढ़ा दिए गए है. 390 रुपए प्रति बोरी सीमेंट के भाव हो गए है़ं.

    वहीं कुछ कंपनियों का सीमेंट 400 रुपए प्रति बोरी तक पहुंच गया है़  उसी तरह लोहे का भाव पिछले साल की तुलना में 2 हजार क्विंटल तक बढ़ गया है़  लोहे की सामग्री के बढ़ते भाव की वजह से कुछ निर्माणकर्ता खरीदने की हिम्मत जुटा नहीं पा रहे हैं. अत्यंत आवश्यक निर्माण कार्य किए जा रहे है़ं  बढ़े हुए सीमेंट के भाव की वजह से कम से कम सीमेंट में वाले आवश्यक काम ही लोग कर रहे है़ं  ग्राहकी न होने से इस क्षेत्र से जुड़े दूकानदारों के चेहरों पर मायूसी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है़  

    भाव बढ़ाए जाने को लेकर उठाए जा रहे सवाल 

    लाकडाउन तथा कोरोना महामारी की वजह से निर्माण कार्य ठप पड़ गए है़  इसके बावजूद सीमेंट तथा लोहे के भाव कंपनियां क्यों बढ़ा रही है़  सरकार का इन कंपनी पर कोई नियंत्रण नहीं है क्या, यह सवाल उठ रहा है़  सीमेंट के भाव बढ़ने से गरीब तथा सरकार की योजनाओं पर परिणाम हो रहा है़.

    सरकार की घरकुल योजना, किसानों के लिए कुओं की योजना के तहत सरकार जो अनुदान देती है, उसका जो इस्टीमेट बनाया गया है उसमें सीमेंट के भाव एक साल पहले के हैं. अनुदान न मिलने की वजह से अनेक घरकुलों के काम आधे-अधूरे रह गए हैं. सीमेंट के भाव बढ़ने से सरकार की तय अनुदान में घरकुल बांधना असंभव है़  

    कंपनियों की सोची समझी साजिश का असर 

    सीमेंट के भाव बढ़ाने में कंपनियों की सोची समझी साजिश है़  सारी बड़ी-बड़ी सीमेंट कंपनी कर्टल बनाकर अपने ब्रांड की कीमतें बढ़ा देती हैं. इस पर सरकार का कोई अंकुश नहीं रहता और ना कोई पार्टी उन्होंने बढ़ाए भावों पर चिल्लाती है़  इसके पीछे का कारण आम नागरिक भी समझने लगे हैं, किंतु आम नागरिक क्या कर सकते हैं.  सरकार ने इस ओर ध्यान देकर सीमेंट के भाव कंट्रोल में लाने की जरूरत है़