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अर्जुनी मोरगांव. खरीफ मौसम में इस वर्ष धान खरीदी करने के लिए आदिवासी विकास महामंडल ने परिसर के केशोरी, गोठणगांव, इड़दा स्थित विविध कार्यकारी संस्था के माध्यम से शासकीय आधारभूत धान खरीदी केंद्र शुकू कर धान खरीदी के लिए सातबारा लेकर शुरुआत की है, लेकिन इन तीनों धान खरीदी केंद्रों पर अतिक्रमण धारक किसानों से धान की खरीदी नहीं करने की वजह से किसान मुश्किल में है.

जबकि गत वर्ष दोनों मौसम में अतिक्रमण धारक किसानों से धान खरीदी की गई है, किंतु इस बार खरीदी नहीं करने का क्या कारण है? ऐसा सवाल खड़ा हो गया है. आगामी 5 दिनों के भीतर अतिक्रमणधारक किसानों से महामंडल ने खरीदी नहीं की तो विरोध में आंदोलन का संकेत विनोद पाटिल गहाणे, योगेश नाकाडे, चेतन दहीकर, दिनेश पाटिल, रहांगडाले ने दिया है.

किसानों ने दिये आंदोलन के संकेत

उल्लेखनीय है कि अर्जुनी मोरगांव तहसील अंतर्गत केशोरी परिसर में खरीफ मौसम में निकला धान खरीदी करने के लिए आदिवासी विकास महामंडल ने केशोरी, गोठणगांव व इडदा इन 3 शासकीय आधारभूत धान खरीदी केंद्रों को शुरू किया है, धान खरीदी के लिए ऑनलाइन पद्धति का सातबारा होना अनिवार्य किया गया है, जबकि उस सातबारा में अतिक्रमणधारक किसानों के नाम नहीं है. शासकीय जगह दर्ज होने से आधारभूत धान खरीदी केंद्रों पर धान बिक्री करने अतिक्रमणधारक किसानों को परेशानी हो रही हैं, इसी तरह धान बिक्री के लिए गत वर्ष कोई परेशानी नहीं हुर्ठ थी. किसानों के धान की सहज रूप से खरीदी की गई थी. अब किसानों ने आंदोलन के संकेत दिये हैं.

निर्णय लेने में विलंब

इस संदर्भ में किसानों ने उपप्रादेशिक अधिकारी नवेगांवबांध से संपर्क किया तो इस पर जल्द ही धान खरीदी करने का निर्णय लिया जाएगा. ऐसा  बताया गया किंतु 8 दिन बितने के बावजूद कोई परिणाम नहीं निकला. जिससे किसानों में रोष व्याप्त है. परिसर के कई अतिक्रमणधारक किसानों के समक्ष धान बिक्री का संकट निर्मित हो गया है.