Birsi, Gondia Airport

गोंदिया. प्रदेश की पिछली सरकार ने अमरावती व शिर्डी हवाई अड्डे के लिए 17 करोड़ 33 लाख 34 हजार रु. का प्रावधान किया था. महाराष्ट्र हवाई अड्डा विकास कंपनी (एमएडीसी) को यह राशि उपलब्ध कराई गई. इस चर्चा में गोंदिया बिरसी विमानतल का उल्लेख उभरकर सामने आया जो वर्षों से सुसज्जित व्यवस्था के साथ स्थापित है जहां यात्री विमान सेवा शुरु करने के लिए बहुत ज्यादा प्रयास करने की जरुरत नहीं होगी.

वर्षों पूर्व रात्रिकालीन उड़ान की व्यवस्था भी तत्कालीन केंद्रीय नागरी उड्डयन मंत्री प्रफुल पटेल के कार्यकाल में कर दी गई थी. इस विमानतल पर अधिक क्षमता वाले विमान लैंड कर सकते है, हर क्षण व 3,200 मीटर लंबे रनवे की व्यवस्था भी है. सरकार आगे बढ़कर पहल करे क्योंकि नागपुर रायपुर के बीच में स्थित होने की वजह से निजी एयर लाईंस यहां से विमानों को यात्री मिलेंगे या नही पर असमंजस में हैं. सरकार प्रायोगिक तौर पर भी उड़ान की व्यवस्था करा सकती है.

फ़िलहाल यहाँ प्रशिक्षु पायलट ट्रेनिंग अकादमी के अलावा चार्टर फ्लाइट आती जाती रहती है.  यह मुद्दा मुख्यमंत्री उध्दव ठाकरे के साथ ही जिले के पालकमंत्री व राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख के लिए भी एक चुनौती का है. क्योंकि सब कुछ अनुकूल होने के बावजूद दीर्घकाल से उड़ान शुरु क्यों नहीं हो रही है? इसकी गहराई में जाकर उन्होंने वस्तुस्थिति का पता लगाना चाहिए. यदि उड़ान की व्यवस्था हो जाती है तो यह इस परिसर के लिए तो विकास की श्रृंखला में महत्वपूर्ण कड़ी  होगी ही लेकिन महाविकास आघाड़ी सरकार की उल्लेखनीय उपलब्धियों में भी इसका समावेश निश्चित रुप से होगा.

एयर लाईंस ने उड़ान की रुचि दिखाई 

बिरसी एयरपोर्ट के तत्कालीन निदेशक सचिन खंगार ने बताया था कि कोरोना से पूर्व कुछ एयर लाईंस ने यहां से उड़ान की रुचि दिखाई थी और इसे लेकर सर्वे भी हुआ लेकिन कोरोना के कारण यह टल गया. उनका मानना था की यहाँ से यदि विमान सेवा प्रारंभ हुई तो उसे अच्छा प्रतिसाद मिलेगा.

एक निजी उड़ान कंपनी फ्लाईबिग जो इंदौर को बेस बनाकर विभिन्न उड़ानों के संचालन में कार्यरत है वह केंद्र सरकार की उड़ान योजना के तहत गोंदिया से उड़ान शुरू करने को लेकर इच्छुक है. यह उल्लेखनीय है कि गोंदिया तीनों राज्यों की सीमा पर है. जिसमें महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ राज्य आते हैं.

बिरसी विमानतल विमान उड़ान सेवा अपरिहार्य है दामोदर अग्रवाल-  अभा राईस मिलर्स एसो. के पूर्व उपाध्यक्ष व पूर्व नगराध्यक्ष दामोदर अग्रवाल  ने कहा कि तत्कालीन केंद्रीय नागरी  उड्डयन मंत्री प्रफुल पटेल के कार्यकाल में बिरसी विमानतल  अंतरराष्ट्रीय स्तर का बना व प्रशिक्षु पायलट अकादमी की स्थापना भी हुई. उस दौरान या उसके बाद नई सरकार के कार्यकाल में भी इतनी लंबी अवधि से व्यवसायिक विमानसेवा का शुरु न होना  आश्चर्य की बात है. देश में उड़ान सेवा के क्षेत्र में जगह जगह शुरुआत हो रही है ऐसे में बिरसी का मुद्दा भी सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ कार्यान्वित किया जाना चाहिए. क्योंकि इसके लिए ज्यादा कुछ करने की आवश्यकता नहीं है व यह सर्वविदित है कि निश्चित रुप से यह शुरुआत जबर्दस्त प्रतिसाद देने वाली साबित होगी और स्वयं प्रशासन महसुस करेगा कि अब तक इसकी शुरुआत क्यों नहीं की गई? 

देश विदेश की सबसे ज़्यादा यात्रा करने वाले वरिष्ठ शल्य चिकित्सक डा. राजेंद्र जैन ने कहा कि यहां बिरसी से व्यवसायिक विमान सेवा की व्यवस्था नहीं होने से किस तरह व्यवहारिक तौर पर असुविधाओं का सामना करना पड़ता है उसका वे विश्लेषण नहीं कर सकते. यदि यह सेवा शुरु होती है तो इस क्षेत्र के विकास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ जाएगा और आश्चर्य नहीं होगा कि उड़ान अकादमी व अत्यंत ही सुविधाजनक व सज्जित इस विमानतल का उल्लेख प्रमुख विमानतलों में होने लगेगा. 

जय बम्लेश्वरी टूर्स व ट्रेवल्स के संचालक बम्लेश्वरी उद्योजक  परिवार के रोशन रामदेव जायसवाल का मानना है कि  बिरसी से विमान सेवा को निश्चित ही प्रतिसाद मिलेगा यहां  से विमान सेवा नहीं होने कारण लोगों नागपुर व रायपुर से फ्लाइट पकडऩी पड़ती है और इसमें अनेकों बार फ्लाइट का छूटजाना व  अन्य कठिनाइयों का सामना भी करना पड़ता है. उनके यहां फ्लाइट से सफर करने वालों की बुकिंग भरपुर होती है. इसी लिए यह निश्चित है कि यदि बिरसी विमानतल से विमान सेवा शुरु होती है तो अपेक्षा से अधिक प्रतिसाद मिलेगा.