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गोंदिया. जिले में खरीफ मौसम की धान रोपाई जोरों से शुरू है, वहीं कठानी खाद्यान्न की बुआई अंतिम चरण में है. जिससे फसल की वृद्धि के लिए खाद की बड़ी संख्या में आवश्यकता है. जिले के अधिकांश कृषि केंद्रों में आवश्यक खाद ही उपलब्ध नहीं है. जिससे किसानों की समस्या बढ़ गई है. इस बार मांग के अनुसार खाद में से लगभग 40 प्रश खाद उपलब्ध है. बावजूद जिले में खाद की कमी नहीं होने की बात कही जा रही है. जिले में 1 लाख 80 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में इस बार के सीजन में फसल बुआई के नियोजन कृषि विभाग ने किया है. इसमें प्रमुख रूप से 1 लाख 77 हजार 750 हेक्टेयर क्षेत्र में तुअर, मूंग, उड़द, तील, सूर्यफुल, गन्ना, कपास, हल्दी, सोयाबीन, अदरक, मकई व सब्जी भाजी की फसल ली जाएगी. जिले में कठानी की 77 प्रश, धान की 80 प्रश व अन्य खाद्यान्न की 41 प्रश बुआई हुई है. वहीं धान फसल की 40 प्रश रोपाई भी हुई है.

83.57 मीट्रिक टन की मांग
फसल की वृद्धि के लिए मिश्र, संयुक्त डीएपी व अन्य खाद की जरूरत है. जिले के कृषि विभाग ने शासन से 83 हजार 57 मीट्रिक टन खाद की मांग की थी. इसमें अब तक 36 हजार 848 मीट्रिक टन खाद का आवंटन किया गया है. 33 हजार 200 मीट्रिक टन यूरिया में से 14,856 मीट्रिक टन यूरिया, डीएपी 3796 में से 1960, संयुक्त खाद 18,145 मीट्रिक टन में से 11,172 मीट्रिक टन तथा मिश्र खाद 6 हजार में से कुछ भी नही. इस तरह खाद की पूर्ति हुई है. 

गत मौसम में 31 मार्च 2020 तक 12 हजार 715 मेट्रिक टन खाद का संग्रह शेष था. मांग के अनुसार 1 अप्रेल से 22 जुलाई 2020 तक केवल 29 हजार 353 मेट्रिक टन खाद की पूर्ति की गई. इसमें मांग के अनुसार केवल 37 प्रश खाद की पूर्ति जिले में की गई है. अप्रेल माह के पूर्व 12715 व वर्तमान में 29 हजार 353 इस तरह कुल 42 हजार 68 मेट्रिक टन संग्रह होने की जानकारी जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी ने विभागीय कृषि सह संचालक नागपुर को भेजे पत्र में दी है. कृषि विभाग के खाद के प्राप्त आकड़ों से जिले में खाद की कमी नही है. जबकि किसानों को खाद उपलब्ध नही हो रहा है. इसमें कुछ कृषि केंद्र के संचालक कृत्रिम कमी निर्माण कर प्रिंटेड कीमत से अधिक दर पर खाद की बिक्री कर रहे है. ऐसा किसानों का कहना है. जिले में रासायनिक खाद की कमी को कृत्रिम कहे या नैसर्गिक सह समझ से परे है. लेकिन इससे किसानों को परेशानी हो रही है.     

सप्ताहभर में उपलब्ध होगा
जिले में खाद की कमी नहीं है. मांग के अनुसार पूर्ति हो रही है. कोरोना वायरस संक्रमण से निर्मित हुई परिस्थिति के कारण खाद रैक पाइंट तक व डीलर, सब डीलर व फिर कृषि केंद्रों तक पहुंचाने में विलंब हो रहा है. जुलाई अंत तक 6550 मीट्रिक टन यूरिया, कृभको का 1400 मीट्रिक टन व इको के 1550 मीट्रिक टन खाद रेलवे ट्रेन की यातायात प्रक्रिया में है. जिससे सप्ताहभर में यूरिया सहित अन्य संयुक्त खाद की उपलब्धता हो जाएगी. ऐसी जानकारी जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी गणेश घोरपडे ने दी है. जिले में सप्ताहभर से धान की रोपाई नहीं हुई है. कृषि केंद्रों में आवश्यक खाद ही नहीं है. खाद ले जाने के लिए कहा जा रहा है. खाद जरूरी है वह 8 से 10 दिनों तक नही मिलेगा. यह जानकारी कुड़वा स्थित एक कृषि केंद्र के संचालक ने दी है. उल्लेखनीय है कि जिले के अधिकांश कृषि केंद्रों में यूरिया खाद उपलब्ध नहीं होने की बात किसानों के ध्यान में आई है. जिससे जिले में खाद की कालाबाजारी हो रही है.