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    गोंदिया. कोरोना का संक्रमण तीव्र गति से बढ़ रहा है. ऐसे में रेमडेसिविर इंजेक्शन, फैबिफ्लू दवाइयों की मांग बढ़ रही है. इसकी तुलना में उपलब्धता कम है. इन दवाइयों की कालाबाजारी के संकेत मिल रहे हैं. जांच पड़ताल करने के लिए मुंबई से अन्न व औषध प्रशासन विभाग (एफडीए) के 3 अधिकारियों की टीम यहां पहुंची व मेडिकल कालेज व दूकानों की जांच की जा रही है.

    बिना डाक्टर की सलाह से दवा ले रहे मरीज

    कोरोना का संक्रमण बढ़ने व अस्पताल में बेड तथा आक्सीजन की समस्या होने से अनेक नागरिक घरों पर क्वारंटाइन में रहकर उपचार ले रहे हैं. जबकि कुछ लोग कोरोना संक्रमण के लक्षण दिखते ही मेडिकल से दवाइयां ले रहे हैं. कोरोना पर उपचार का डोज यह हेवी है. डाक्टर की सलाह के बिना स्वयं दवाइयां लेना खतरे से खाली नहीं है. केवल लक्षण होने से बिना जांच के उपचार शुरू करने वाले नागरिकों की संख्या बढ़ गई है जिससे अनेक जरूरतमंदों दवाइयां मिलना कठिन हो गया है.

    दवाइयों की किल्लत

    जिला मुख्यालय में पिछले 4-5 दिनों से कोरोना दवाइयों का अभाव देखा जा रहा है. रेमडेसिविर इंजेक्शन, फैबिफ्लू, फैविफीवर यह दवाइयां नहीं मिल रही है इसे लेकर चिंता व रोष व्यक्त किया जा रहा है.  कंपनियों के माध्यम से इन दवाइयों की पूर्ति नहीं होने से मेडिकल स्टोर्स भी परेशान हैं. निर्मित हालातों की समीक्षा करने के लिए मुंबई से अन्न व औषध प्रशासन विभाग के 3 सदस्यीय टीम यहां पहुंची व  शहर के थोक व चिल्लर दवा  दूकानों में पहुंचकर बारीकी से जांच की.  इसी तरह मेडिकल स्टोर्स के संचालकों को आवश्यक निर्देश दिए गए. 

    प्रिस्क्रिप्शन के बिना दवाई नहीं

    कोरोना प्रभावित मरीजों को डाक्टर के प्रिस्क्रिप्शन व आरटीपीसीआर जांच के अहवाल बिना कोरोना की दवाई न दें.  नहीं प्रिस्क्रिप्शन के बिना मरीजों को दवाई की बिक्री करने वाले मेडिकल स्टोर्स के विक्रेताओं के लायसेंस रद्द करने की चेतावनी दी गई.