Mandai in Gondia

  • सदभावना व भाईचारे का प्रतीक है उत्सव

बिरसी फाटा (तिरोड़ा). दिवाली रौनक, पकवान, मुस्कराहट, साफ सफाई, खुशियों का त्योहार है. घर-घर में सुंदर रंगोली व दीये जलाए जाते हैं. आतिशबाजी की जाती है. बड़े छोटे सभी इस त्योहार में शामिल होते हैं. सामूहिक व व्यक्तिगत तौर पर मनाए जाने वाला ऐसा विशिष्ट पर्व है जो धार्मिक, सांस्कृतिक व सामाजिक विशिष्ठता रखता है. अंधकार पर प्रकाश के विजय का प्रतीक है. समाज में उल्लास, भाईचारे व प्रेम का संदेश फैलाता है. दीर्घकाल से चली आ रही परंपरा का जतन करते हुए त्योहार कार्तिक पूर्णिमा तक मनाया जाता है. इस वर्ष कोरोना के चलते कई ग्रामों में मंडई की परंपरा कायम रखते हुए सादगीपूर्ण तरीके और कहीं पूरे उत्साह के साथ हर वर्षं की भांति मनाया जा रहा है.

नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियां

शासन की ओर से जारी की गई गाइड लाइन की धज्जियां उड़ते देखा गया. हजारों की संख्या में उपस्थित मंडई महोत्सव में न सामाजिक दूरी का पालन न ही मास्क लगाना लोगों ने जरूरी नहीं समझा. कुछ ही लोग मास्क लगाए दिख रहे हैं. लक्ष्मी पूजन के बाद भाईदूज के दिन से गांवों में मंडई महोत्सव का आयोजन किया जाता है. मंडई मेले का आयोजन इस बार भी लाखेगांव, बिरसी, गुलाबटोला व परिसर के गांवों में किया गया. पहले जैसा उत्साह नजर नहीं आया. सिर्फ सांकेतिक आयोजन हुए. 

झांकियां रही आकर्षण का केंद्र

बोपेसर में मंडई हर्षोल्हास के साथ मनाई गई. जिसमें दिन में दंडार व रात्रि में नाटक का आयोजन किया गया. बोपेसर गांव की मंडई लोकप्रिय है. इस गांव में युवाओं द्वारा महीने भर पहले से तैयारी की जाती है. हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी स्वच्छता, अंधश्रद्धा व व्यसनमुक्ति पर दंडार आयोजित की गई. भडमा भडमी, हाथी घोडा, डायनासोर, हवाई जहाज की झांकियां आकर्षण का केंद्र रही. मंडई महोत्सव से युवाओं को रोजगार प्राप्त होता है.