Gondia-Jabalpur Broad gauge project

गोंदिया. गोंदिया-जबलपुर ब्रॉडगेज प्रारंभ करने को लेकर प्रशासन की ओर से तैयारियां जोरों से शुरु है और अनुमान है कि इस माह के अंत तक यह शुरू हो जाएंगी.भारतीय रेल अपने आप में एक दुनिया है. यात्रियों की भागदौड़ भरी जिंदगी रेल की पटरियों की तरह बदलते दिनों में परिवर्तित होती रहती है, एक जगह से दूसरी जगह यात्रियों को छोड़ते व बिठाते हुए सफर दर सफर की हमसफर रही भारतीय रेल का इतिहास गवाह है कि रेल ने न सिर्फ कम खर्चे में सुगम यातायात को प्रशस्त किया है बल्कि शहरों व कस्बों के विकास में भी इसकी बड़ी भूमिका रही है.

जबलपुर-गोंदिया ब्राडगेज परियोजना पूरे क्षेत्र के लिए मायने रखती है, इस परियोजना को पूरा होते देखने में संघर्ष व उम्मीदों का ऐसा दायरा रहा है जो कभी नहीं टूट पाया है. तभी तो 23 बरस बीतने के बाद भी इस परियोजना के पूर्ण होने की खुशी है.

चार राज्य जुड़ेंगे

महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश व आंध्रप्रदेश के साथ ही कनार्टक को जोड़ने वाली यह परियोजना बड़ी अहम है जिसके माध्यम से उत्तर से दक्षिण को जोड़ने वाले एक नये मार्ग के साथ ही रेल इतिहास के नये युग का प्रारंभ  हो जाएगा. 

लाइफ लाइन रही नैरोगेज 

नैरोगेज जो पहले यात्रियों के लिए लाइफ लाइन मानी जाती थी वैसे ही अब भी यह रेल मार्ग लाइफ लाइन ही कहलायेगा, क्योंकि यह एक ऐसा मार्ग है जहां से छोटे गांव कस्बों तथा आदिवासी वनांचल क्षेत्रों का रेलसेवा से सीधा जुड़ाव बनता है, गांव की हस्तकला, कारीगरी, कलाकार को पहचान दिलाने में कभी नैरोगेज बड़ी भूमिका में रही है, साथ ही मजदूर, खेतीहार किसान व सामान्य यात्रियों के लिए भी इस  परियोजना का अपना ही मुकाम है, नैरोगेज काल की यादें अब भी जेहन में है और ऐसा लगता है कि  23 बरस हुए ही नहीं बल्कि कल की ही बात हो.

स्टेशनों के यह नाम अविस्मर्णीय 

लामटा, नगरवाड़ा व चांगोटोला इन क्षेत्रों के  रेलवे स्टॉपेज को छोड़ भी दिया जाए तो इस रेल मार्ग में पड़ने वाले बिनैकी, सुकरीमंगेला, जेवनारा यह पैसेंजर स्टॉपेज के नाम अब भी यादों में है़ इसके अतिरिक्त शिकारा हाल्ट स्टेशन तो उन दिनों सर्वाधिक चर्चित रहा है. 

वन अड़ंगों से रुका था मार्ग 

गोंदिया-जबलपुर के बीच नवच्छादित संपदा व वनजीवों की संख्या को देखते हुए ब्राडगेज परियोजना पर स्टे लग गया था़ वन मंत्रालय द्वारा घने जंगलो के बीच पटरियां बिछाने से इंकार कर दिया गया था़ यही वजह रही की वन अडंगों के बीच ब्राडगेज निर्माण ठप पड़ गया था, तत्कालीन समय में वन विभाग का तर्क था की यहां से अगर ब्राडगेज परियोजना होकर गुजरेगी तो ववजीव व वनसंपदा का बड़ा नुकसान होगा ,लेकिन बाद में जनप्रतिनिधियों व रेल कमेटी के सदस्यों के प्रयासों से यात्री सुविधा को देखते हुए वन अनुमति मिल ही गई व ब्राडगेज निर्माण फिर शुरू हो पाया. 

इलेक्ट्रीफिकेशन भी है उल्लेखनीय

गोंदिया-जबलपुर ब्राडगेज परियोजना एक तरह से इसलिए भी अहम हो जाती है क्योंकि यह देश की पहली ऐसी परियोजना है जो ट्रैक बिछाने के साथ ही इलेक्ट्रीफिकेशन कार्य को पूर्ण कर रही है़ परियोजना से उत्तर-दक्षिण के बीच नया मार्ग स्थापित होगा व दूरियां लगभग 274 किमी कम होगी व यात्रियों के अतिरिक्त खर्चे व समय की बचत होगी. इस मार्ग से अब ट्रेनें सीधे बल्लारशाह-गोंदिया-बालाघाट-जबलपुर को जाएगी. 

रेलवे की तैयारियां

चरणबध्द तरीके से पूर्ण हुए इस परियोजना में जबलपुर से आमान परिवर्तन कार्य शुरू हुआ था, जिसमें ग्वारीघाट, घंसौर व फिर नैनपुर तक नैरोगेज को ब्राडगेज रुट में परिवर्तित किया गया. इसके बाद नैनपुर से लामटा के बीच निर्माण में काफी समय लग गया़ रेलवे ने इस मार्ग को अतिशीघ्र पूर्ण करने में कोई कसर नहीं छोड़ी लेकिन हालात ही ऐसे बने की रेलमार्ग के लिए दिक्कतें कम ही नहीं हुई, इसके बाद बारी थी लामटा-समनापुर मार्ग की तो तीव्रता से कार्य करते हुए इस रेल मार्ग को लगभग 8 माह की अवधि में ही तैयार कर लिया गया व इस मार्ग पर इंजन भी दौड़ाया गया़ इसके बाद रेलवे सेफ्टी ऑफ कमीशन की टीम पहुंची और उसके प्रमाणित किए जाने के बाद जबलपुर-बालाघाट-गोंदिया ब्राडगेज परियोजना पूर्णता के अंतिम चरण में है.    

ब्राडगेज परियोजना

इंद्रकुमार गुजराल की सरकार में रेलमंत्री रहे रामविलास पासवान के कार्यकाल में गोंदिया-जबलपुर ब्राडगेज परियोजना की आधारशीला रखी गई थी. जब नैरोगेज ट्रेन बालाघाट होते हुए जबलपुर के बीच चला करती थी. विकास व आधुनिक युग में प्रवेश करने वाले भारत के लिए यह मुफीद नहीं था कि रफ्तार के युग में नैरोगेज को चलाया जाए.

वहीं दूसरी ओर ब्राडगेज परियोजना की मांग भी जोर पकड़ रही थी और मार्ग के विभिन्न स्थानों में ऐसे आंदोलन हुए जिससे रेल मंत्रालय तक यह बात पहुंचाई गई. क्षेत्रीय विकास व यात्रियों की सुविधा के लिए आमान परिवर्तन कर ब्राडगेज बनाई जाए, जिसके लिए स्वयंस्फूर्त अभियान भी देखने को मिले व तत्कालीन जनप्रतिनिधि, राजनेताओं व आम जनता के माध्यम से पोस्ट कार्ड व हस्ताक्षर अभियान सहित अन्य क्रम बध्द आंदोलन भी हुए. इस ब्राडगेज परियोजना की अहमियत का अहसास सभी को हुआ.