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तिरोड़ा. तहसील में रेत माफियाओं का बोलबाला बढ़ गया है. नदी के घाटों की निलामी नही होने से रेत माफियाओं द्वारा बड़े पैमाने पर रेती का अवैध उत्खनन शुरु है. इतना ही नही राज्य की सीमा से जुड़े मध्यप्रदेश के घाटों से रेती तहसील में पहुंच रही है. इस व्यवसाय में अनेक लोग जुड़ गए है. इसमें भारी प्रतिस्पर्धा होने के बाद भी निर्माण कार्य करने वालों को भारी कीमत चुकाकर रेती की खरीदी करनी पड़ रही है.

अवैध रेती माफियाओं के खिलाफ पुलिस विभाग व राजस्व अधिकारियों के माध्यम से सतत कार्रवाई की जा रही है. इसमें ट्रैक्टर, ट्राली, ट्रक, जेसीबी मशीनों सहित करोड़ों रु. की सामग्री जब्त की गई है. लेकिन रेती की तस्करी करने वालों पर कोई अंकुश नही लग पाया है. इसके विपरित अवैध रेती का व्यवसाय दिन ब दिन फलफुल रहा है.

पालकमंत्री के आदेश की अनदेखी
रेती घाटों की नीलामी नही होने की शिकायत कुछ लोगों ने पालकमंत्री अनिल देशमुख से की थी. मध्य प्रदेश की रेती महाराष्ट्र राज्य में आने की बात से भी अवगत कराया था. इस पर देशमुख ने मध्यप्रदेश की रायल्टी नही चलेगी कहा था. इसी तरह चेक पोस्ट, टोल नाके बनाकर सीसी टीवी कॅमरे लगाने के आदेश दिए थे. इसमें एक भी रेती भरा वाहन मध्यप्रदेश से राज्य में आने पर संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई करने की बात भी कही थी. उन्होंने रेती घाटों की नीलामी प्रक्रिया जल्द पुर्ण करने का आश्वासन भी दिया था. इस बात को 3 माह की अवधि बीत गई है लेकिन इस आश्वासन की पूर्ति नही हुई है.

गरीब व सामान्य व्यक्तियों को औने पौने दामों पर रेती सहज मिल जाती थी. नीलामी के अभाव में रेती की खरीदी करना गरीबों के बस में नही रह गया है. इस क्षेत्र के नागरिकों ने शासन से घाटों की नीलामी तत्काल करने की मांग की है. जिससे आसमान पर पहुंच गए रेती के दाम जमीन पर आ जाएंगे.