Malguzari Lake

सडक़ अर्जुनी. यह जिला मामा तालाबों के जिले के रुप में पहचाना जाता है. सौंदड़ के मालगुजारी मामा तालाब का वेस्टवेयर कुछ असामाजिक तत्वों ने तोडक़र तालाब में संग्रहित जलस्तर को कम कर दिया है. जिससे तालाब किनारे की धान फसलों का नुकसान हो गया. कुछ लोगों ने तालाब की जमीन पर भी अतिक्रमण कर खेती करना शुरु कर दिया है. तालाब के मध्य भाग से राष्ट्रीय महामार्ग क्र. 6 गया है. उसकी दोनों ओर व्यवसायियों ने अतिक्रमण कर अपनी दुकानें लगा ली है. इस ओर सौंदड़ की मालगुजारी तालाब पानी वितरण समिति ने ध्यान नहीं दिया. पिछले 20 वर्षों से यह समिति एक तरफा कार्य कर रही है, ऐसी चर्चा व्याप्त है.

पहले बारिश के दिनों में वेस्टवेयर से पानी ओवर फ्लो होकर महामार्ग से बहता था, तब तालाब का वेस्टवेयर 1 फुट नीचे किया गया, कुछ वर्षों बाद महामार्ग की उंचाई 2 मीटर से बढ़ाई गई तब वेस्टवेयर को फोडऩे की आवश्यकता नही पड़ी, तालाब का जलस्तर बढऩे से रबी मौसम में भी इस तालाब का पानी धान फसल को मिलता है, यह मामा तालाब सिंचाई उप विभाग नवेगांवबांध अंतर्गत सौंदड़ शाखा अभियंता की देखरेख में है. इसी विभाग अंतर्गत पानी वितरण समिति कार्यरत है, लेकिन इस समिति का कार्यभार एकाधिकारशाही पध्दति से शुरु है, तालाब परिसर में अतिक्रमण जोरों पर है लेकिन इस ओर समिति का ध्यान नही है.

समिति पिछले 5 वर्ष से 350 हेक्टर खेत जमीन खरीफ मौसम के पानी के लिए 100 रु. प्रति एकर की दर से किसानों से ले रही है, वहीं रबी मौसम में 70 से 80 एकर खेती के लिए 800 से 1000 रु. प्रति एकड़ की दर से किसानों से ले रही है. इस वर्ष समिति के पास रुपए नही होने से उन्होंने इसकी लिखित जानकारी शाखा अभियंता से की है. साथ ही असामाजिक तत्वों द्वारा तोडे गए वेस्टवेयर की जानकारी भी शाखा अभियंता को दी गई.

किसानों को इस बात पर शंका हो रही है कि जो समिति पिछले 20 वर्षों से अपना एकाधिकार रखते हुए पानी वितरित कर रही है उनके पास पानी पट्टी फंड की कमी कैसे हो सकती है. किसान पिछले 20 वर्ष से पानी वितरण समिति का लेखा जोखा भी प्रस्तुत करने की मांग सिंचाई उप विभाग नवेगांबांध से कर रहे है. लेकिन उसकी अनदेखी की जा रही है.