पशु वैद्यकीय कानून को लेकर आंदोलन, 15 जून से कर्मी कर रहे प्रदर्शन

    गोंदिया. महाराष्ट्र में पशुपालन विभाग के पशुधन पर्यवेक्षकों, सहायक पशुधन विकास अधिकारियों व  पशुधन विकास अधिकारियों (ग्रुप बी) का 11 मांगों के लिए 15 जून से असहयोग आंदोलन शुरू है. आयुक्त पशुपालन, महाराष्ट्र राज्य व मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिप गोंदिया, जिला पशुपालन उपायुक्त गोंदिया व जिला पशुपालन अधिकारी के ध्यान नहीं देने के कारण पूरे महाराष्ट्र में आंदोलन फैल गया है.

    हमेशा बारिश का मौसम होता है, किसान खेती में लगा रहता है. इसी प्रकार वे अपने पशुओं पर बहुत अधिक निर्भर रहते हैं. ऐसे दिनों में पशुओं के रोग भी अधिक होते हैं. सर्पदंश, अतिसार तथा आंतों में विषैलापन जैसी महामारियों के फैलने की प्रबल संभावना रहती है. 1984 का अधिनियम पशुधन पर्यवेक्षक, सहायक पशुधन विकास अधिकारी को दवाओं को संभालने, ले जाने और उपयोग करने से रोकता है.

    कानून यह निर्धारित करता है कि टीकाकरण व दवा की निगरानी एक पंजीकृत पशुधन विकास अधिकारी द्वारा की जानी चाहिए. पशुधन पर्यवेक्षक और सह-पीवीए डिप्लोमा धारक हैं व अनेक वर्षों से पशुधन का सफलतापूर्वक उपचार कर दवाएं दे रहे हैं तथा टीकाकरण कर रहे हैं. लेकिन कुछ अधिकारी यह सुनिश्चित करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं कि उनके संगठन के माध्यम से 1984 का कानून नहीं बदला जाए व इस प्रक्रिया में केवल सामान्य किसान शामिल हों.

    अपनी भूमिका पर अड़े

    पशुधन पर्यवेक्षक, सहायक पशुधन विकास अधिकारी 1984 अधिनियम के अनुसार अपनी भूमिका पर अड़े हुए हैं और जब तक अधिकारों के विकेंद्रीकरण सहित अन्य मांगों को पूरा नहीं किया जाता है, तब तक आंदोलन वापस नहीं लेंगे. जिला पशु चिकित्सक संघ, गोंदिया की ओर से मांग की जा रही है कि डेयरी विकास मंत्री ध्यान दें और लंबित मांगों पर चर्चा कर कोई रास्ता निकालें.

    पशु चिकित्सक संघ की ओर से लंबित मांगों को लेकर विधायक विनोद अग्रवाल को ज्ञापन सौंपा गया. वेटरनरी प्रैक्टिशनर्स एसो. के अध्यक्ष डा. सैयद, सचिव डा. डोंगरवार, कार्यकारी अध्यक्ष डा. राठौड़, कोषाध्यक्ष डा. डेकाटे उपस्थित थे.