Andolan

गोंदिया. शासकीय महिला अस्पताल बीजीडब्यु में कार्यरत नर्सिंग कॉलेज की छात्रा सुहानी गजानन बांगरे की मृत्यु मेडिकल कॉलेज प्रशासन की लापरवाही से हुई है. प्रकरण में दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर पीडित परिवार को न्याय दिलाने को लेकर युवाओं की आवाज गैर राजनीतिक संगठन ने जिलाधीश को अवगत कराया है. सुहानी बांगरे की 15 दिन से तबीयत ठीक नही थी, वह प्राचार्य से सतत छुट्टी मांग रही थी लेकिन उसकी छुट्टी मंजूर नही की गई.

इस बीच तबीयत अधिक बिगड़ जाने पर 29 जुलाई को उसे केटीएस जिला सामान्य अस्पताल के आईसीयु वार्ड में भर्ती किया गया. वह खुन की उल्टियां कर रही थी. सुहानी के स्वास्थ्य की ओर डाक्टरों ने अनदेखी कर दी. उसके चलते 1 अगस्त की शाम 4 बजे उसकी मृत्यु हो गई. इतनी गंभीर रुप से बीमार होने के बाद भी डाक्टर उसे केवल पॅरासिटामोल की गोली देते रहे. जबकि उसके पिता गजानन बांगरे ने जिला शल्य चिकित्सक से भेंट कर निजी अस्पताल में उपचार करने के लिए उसे छुट्टी देने की मांग की थी. इसे भी नजरअंदाज कर दिया गया. जिलाधीश ने जांच समिति गठित करने का आश्वासन दिया. संगठन ने आपत्ती दर्ज कर जिला स्वास्थ्य अधिकारी व नागपुर मेडिकल कॉलेज के डीन को समिति में शामिल करने की मांग की है.

बिरसोला के सरपंच कसेलाल मातरे व जकीर खान ने बताया कि डाक्टरों की लापरवाही से बिरसोला की महिला राजवंती पाचे को एम्ब्युलेंस पर नागपुर ले जाते वक्त सिलेंडर का आक्सिजन अचानक खत्म हो जाने से उसकी मृत्यु हो गई. इन दोनों का कहना है कि छोटी छोटी घटना वाले मरीजों को भी नागपुर रेफर कर दिया जाता है.

रजेगांव में सुसज्जित अस्पताल बनाया गया है. जहां सुबह 8 से 12 बजे तक ओपीडी के दौरान डाक्टर उपस्थित रहते है. जिससे अस्पताल व वहां के मरीज भगवान भरोसे रहने को मजबूर हो जाते हंै. सचिन रहांगडाले, विजय रहांगडाले, ओमप्रकाश पारधी, शाहरुख पठान, जाकीर खान, राकेश मिश्रा, निशा सादेपाच, कुंदा भास्कर, माधुरी मेश्राम, रविंद्र चिखलोंढे, त्रिवेणी हनवते आदि उपस्थित थे.