ऑनलाइन शिक्षा बनी सिरदर्द, नियमित कक्षा लगाने के लिए नहीं हैं उपयुक्त साधन

    गोंदिया. कोरोना संक्रमण ने हर किसी का टाइम टेबल बदलकर रख दिया है. संक्रमण के कारण लगभग 2 वर्षों से स्कूल बंद हैं जिसके कारण आनलाइन क्लास ली जा रही है. संक्रमण के कारण लाकडाउन लगाया गया जिसमें स्कूल बंद रखी गई थी इसकी वजह से विद्यार्थी स्कूल नहीं जा पाए. लेकिन विद्यार्थियों को पास कर उन्हें अगली क्लास में प्रमोट किया गया है.

    शिक्षक विद्यार्थियों को आनलाइन पढ़ा रहे हैं. जिन पालकों के पास एंड्रायड मोबाइल नहीं थे उन्हें इसे खरीदना पड़ा ताकि उनका बच्चा पढ़ाई में न पिछड़े. महीने में इंटरनेट रिचार्ज की भी व्यवस्था करनी पड़ी. शहरों में फिर भी अधिकांश व्यवस्था ठीक थी लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में इतना करने के बाद भी इंटरनेट की कनेक्टिविटी नहीं मिलना सबसे बड़ा सिरदर्द साबित हुआ.

    अब नया सत्र 28 जून से शुरू हो गया है. तीसरी लहर और बच्चों पर खतरा सिर पर है. ऐसे में इन दिक्कतों के कारण खासकर ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए आनलाइन शिक्षा फिर परेशानी का सबब बनेगी.  

    मोबाइल से आंखें कमजोर होने का खतरा

    बच्चों के हाथ में मोबाइल आने से उन्हें भविष्य में कई तरह के विकारों या बीमारी का सामना करना पड़ सकता है. खासकर आंखें कमजोर होने का खतरा है. कोरोना के कारण लगे लाकडाउन की वजह से बेरोजगार हुए माता पिता आनलाइन पढ़ाई से काफी परेशान हैं. सरकारी या अनुदानित स्कूलों में पालकों को फीस नहीं भरनी पड़ती.

    लेकिन बिना अनुदानित स्कूलों में भरनी पड़ी फीस के कारण पालक वर्ग काफी परेशान हैं. 2 सत्र से कोरोना के कारण लगे लाकडाउन की वजह से अपनी नौकरी खो चुके माता पिता अपने बच्चों को शिक्षित करने के लिए काफी तकलीफ उठा रहे हैं.

    भविष्य पर पड़ेगा असर

    कोरोना संक्रमण के कारण सरकार ने पहली से 12वीं तक के बच्चों को प्रमोट करने का निर्णय लिया. विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे बच्चों के भविष्य पर खासा असर होगा. कई बच्चे पढऩे में काफी पिछड़ गए हैं. स्कूली माहौल से दूर होने के कारण बच्चों पर काफी विपरीत असर हो रहा है. ग्रामीण क्षेत्रों में कई माता पिता अभी भी नहीं जानते की स्मार्ट फोन को कैसे संभालना है.

    सारी शिक्षा आनलाइन होती है. विशेषज्ञों द्वारा कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की आशंका व्यक्ति की जा रही है. इसमें बच्चों पर काफी असर होने की बात कही जा रही है. ऐसे में यह शैक्षणिक सत्र भी आनलाइन ही होने की संभावना है. इस स्थिति में बच्चों का हो रहा शैक्षणिक नुकसान किस तरह कम किया जाए इस चिंता में न सिर्फ अभिभावक हैं बल्कि शिक्षक भी काफी चिंतित हैं.