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गोंदिया. कोरोना संक्रमण को रोकने के उद्देश्य से गत मार्च माह में संपूर्ण देश में लगाए गए लॉकडाउन के बाद ठप पड़े उद्योग धंधों की वजह से बमुश्किल अपनी जान हथेली पर रखकर मजदूर अपने घर पहुंचे. उनके गांव में आने के बाद रोजगार के अभाव में भुखमरी से निजात पाने के लिए अब अपनी जान जोखिम में डालकर रोजगार की तलाश में पुन: अपना परिवार लेकर शहरों की ओर पलायन करने लगे है. जबकि लॉकडाउन के समय केंद्र सरकार ने सभी मजदूरों को उनके गंतव्य स्थान पर रोजगार उपलब्ध कराने का दावा किया था. जो खोखला निकला.

गांवों में आने के बाद मजदूरों में भुखमरी व कर्ज बाजारी निर्मित होने लगी. जिससे मजदूर अब पुन: शहरों की ओर पलायन करने लगे है. बताया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में निवासरत अधिकांश लोग मजदूरी पर निर्भर है, जो शहरों में जाकर मजदूरी कर अपना उदर निर्वाह करता है.

लॉकडाउन में सभी मजदूर अपने अपने ग्रामों में आने के बाद उनका रोजगार हाथ से निकल जाने से गांव में जीवनयापन करने की समस्या निर्मित हो गई. कुछ दिन इंतजार किया कि इस पर प्रशासन द्वारा कोई साधन उपलब्ध नही करा रही है, और न ही कोरोना का संक्रमण रुक रहा है. ऐसी स्थिति में करें तो क्या करें? चारों ओर समस्या का अंबार लगा हुआ है. जिससे मजदूरों को शहरों की ओर पलायन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा.

कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए करोड़ों की निधि खर्च होने की बात कही जा रही है. अब शहरों की ओर पलायन करने वाला मजदूर वर्ग दीपावली का त्यौहार मनाने अपने गांव पुन: वापस आएगा. सभी ओर कोरोना कहर बरपा रहा है. ऐसी स्थिति में एक बार फिर दिवाली जैसे त्यौहार के समय भी कोरोना का जोर पकडऩे की आशंका व्यक्त की जा रही है.