जिप शालाओं के कमरे जर्जर

    गोंदिया. प्रगत शैक्षणिक महाराष्ट्र ने प्राथमिक शिक्षा में परिवर्तन करने का मानस व्यक्त किया है. इसके बावजूद भौतिक सुविधा के अभाव में आवश्यक प्रमाण में जिला परिषद शालाओं की बदहाली  वर्षों के बावजूद वैसी ही है.  आज भी  जिले की जिप शालाओं के 730 कक्षा कमरे विद्यार्थियों के लिए खतरा  बने हुए हैं जो कभी भी घातक दुर्घटनाओं का कारण बन सकते हैं.

    शासन ने जिप की शालाओं में दिन ब दिन कम हो रही विद्यार्थियों की संख्या रोकने के लिए प्रगत शैक्षणिक महाराष्ट्र उपक्रम शुरू किया. इसमें वाचन आनंद दिवस, ज्ञान रचनावाद, डिजिटल शाला, अक्षर सुधार कार्यक्रम जैसे विभिन्न उपक्रम चलाए जाते हैं. जिप की शालाओं के विद्यार्थी शहर की निजी शालाओं के विद्यार्थियों से भी ज्यादा स्मार्ट हों इसके लिए जिप के शिक्षा विभाग ने विभिन्न उपक्रम क्रियान्वित किए.

    भौतिक सुविधा के लिए गांव की शाला हमारी शाला यह उपक्रम शुरू रखा लेकिन निधि की कमी के कारण जिप शालाओं के 730 कक्षा कमरे विद्यार्थियों के लिए खतरे से खाली नहीं हैं. जबकि जिप शिक्षा विभाग ने कक्षा कमरों की दुरुस्ती का प्रस्ताव भी भेजा है. 

    139 नए कक्षा कमरों का कब होगा निर्माण 

    जिप शालाओं में वर्तमान में 139 कक्षा कमरों की अत्यंत आवश्यकता है. इन कक्षा कमरों के बन जाने पर विद्यार्थियों को बैठने की सुविधा होगी. जिले के लिए कक्षा रूम की जरुरत होने पर प्राथमिक शिक्षा विभाग ने शासन को प्रस्ताव भेजा है. 

    सभी तहसीलों में हाल बेहाल

    जिप अंतर्गत संचालित प्राथमिक शालाओं के अधिकांश कक्षा कमरे  जीर्ण हो गए हैं. इसमें तहसील अनुसार खतरे वाली शालाओं की सूची इस प्रकार है. आमगांव तहसील अंतर्गत 79, अर्जुनी मोरगांव 93, देवरी 90, गोंदिया 119, गोरेगांव 103, सडक अर्जुनी 68, सालेकसा 70 व तिरोडा तहसील में 108 शालाओं का समावेश है. इस संबंध में जिप  शिक्षा विभाग के एक प्रवक्ता के अनुसार जिप की 1039 शालाओं में से 476 शालाओं की 730 कक्षा कमरे जीर्ण शीर्ण अवस्था में है. उन्हें तोडने के संदर्भ में संबंधित गट शिक्षाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं.