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    -सीमा कुमारी

    ये तो सभी सभी जानते हैं कि हंसना सेहत (Laughing is good for health) के लिए अच्छा माना जाता है,  जबकि रोना सेहत के लिए हानिकारक  हैं। अब बताइए अब तक हम यही सुनते आए हैं, लेकिन क्या कभी सुना है कि रोना भी स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है ?

    जिस तरह खुलकर हंसना सेहत के लिए फायदेमंद है, ठीक उसी तरह फूट-फूट कर रोना भी बेहद जरूरी है। कहते हैं, जीवन में खुशियों के लिए रोना भी जरूरी है, क्योंकि हंसने के साथ रोना भी भावनाएं व्यक्त करने का तरीका है। रोना भी सेहत को उतना ही फायदा देता है, जितना हंसना लेकिन आखिर आप और हम रोते क्यों हैं ? रोने और आंसू आने के पीछे की वजह क्या है? रोने के क्या-क्या फायदे हैं, यहां जानें…

    • हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बिना भावुक हुए रोने से, यानी आंसू बहाने से भी सेहत को कई फायदे मिलते हैं। जब आप प्याज काटते हैं, तो प्याज से एक रसायन निकलता है और वो हमारे आंखों की सतह तक पहुंचता है।  इससे सल्फ्यूरिक एसिड बनता है। इससे छुटकारा पाने के लिए आंसू की ग्रन्थियां आंसू निकालती हैं जिससे आंखों तक पहुंचा रसायन धुल जाता है। आंसुओं में  लाइसोजाइम भी होता है, जो एंटीबैक्टीरियल और एंटी वायरल होता है। ग्लूकोज से आंखों की सतह की कोशिकाएं मजबूत होती हैं।
    • अल्जाइमर रिसर्च सेंटर रीजन्स हॉस्पिटल फाउंडेशन के डायरेक्टर, विलियम एच फ्रे (Williams H Fray) ने भी प्रतिभागियों को सैड मूवीज दिखाई। विलियम के मुताबिक, हम रोने के बाद इसलिए अच्छा महसूस करते हैं, क्योंकि इससे तनाव के दौरान उत्पन्न हुए केमिकल्स बाहर निकल जाते हैं। हमें ये तो नहीं पता कि ये केमिकल्स कौन से होते हैं, लेकिन आंसुओं में एक रसायन होता है जो, तनाव के दौरान बढ़ता है। फ्रे के अनुसार, यह जरूरी है कि हम कभी-कभार रोएं। इससे तनाव कम होता है, और हार्ट और मस्तिष्क को क्षति नहीं पहुंचती है। हमें अपनों बच्चों को रोने से नहीं रोकना चाहिए, बल्कि हमें खुश होना चाहिए, क्योंकि उनके अंदर यह क्षमता है।
    • आंसू शरीर के भीतर अश्रु-नलिकाओं से होकर नासिका तक पहुंचते हैं, जिससे नाक में जमा गंदगी साफ हो जाती है। रोने के दौरान अक्सर नाक बहने लगती है, जिसके पीछे का मुख्य वजह है, रोने से नाक में जमा बैक्टीरिया और गंदगी बाहर निकल जाती है।
    • डॉक्टर फ्रे के मुताबिक, महिलाएं महीने में औसतन 5.3 बार रोती हैं, जबकि पुरुष औसतन 1.3 बार ही रोते हैं। इस फर्क की वजह यह है कि पुरुषों में टेस्टरोन हार्मोन होता है, जबकि महिलाओं में प्रौलैक्टीन नामक हार्मोन होता है, जो रोने के लिए प्रेरित करता है।
    • डॉक्टर फ्रे के मुताबिक, आंसू ग्रन्थियां पुरुषों और महिलाओं की आंसू ग्रन्थियों (Tear glands) में भी अंतर होता है। लेकिन, पुरुषों के नहीं रोने की सबसे बड़ी वजह लैंगिक और सांस्कृतिक है, जो पुरुषों को रोने के फायदों से वंचित करवाता है।
    • डॉक्टर ऑरलॉफ (Dr. Orloff) कहते हैं, “रोने के बारे में भ्रमों से बाहर निकलना चाहिए। रोना स्वास्थ्य के लिए अच्छा है, और यह पुरुषों और महिलाओं दोनों की सेहत के लिए ही अच्छा होता है।