प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

    -सीमा कुमारी

    आज भारत (India) में महिलाओं (Women) में ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) की बीमारी बहुत तीव्र गति से बढ़ रही है। भारत में हर 8 में एक महिला ब्रेस्ट कैंसर की चपेट में है। ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ (WHO) की रिपोर्ट्स (Reports) के अनुसार, हर साल कैंसर के लगभग 1.38 मिलियन मामले होते हैं। अकेले भारत में, हर 20 शहरी महिलाओं में से एक को स्तन कैंसर (Breast Cancer) का पता चलता है और हर चार मिनट में एक डायग्नोसिस की पुष्टि होती है। दुर्भाग्यवश स्तन कैंसर को लेकर भारत में जागरुकता का बहुत अभाव है। बहुत कम लोगों को पता है कि ब्रेस्ट कैंसर 12 प्रकार का होता है।

    डॉक्टरों के मुताबिक, शरीर के किसी भी हिस्से में कोशिकाओं की असामान्य और अनियंत्रित वृद्धि होने से कैंसर हो सकता है। इसी तरह से ब्रेस्ट कैंसर भी होता है। ब्रेस्ट कैंसर की शुरुआत में ब्रेस्ट के आसपास गांठ बनने लगती हैं। जिसके कारण दर्द होने लगता है। इसके अलावा कई बार लापरवाही से भी ब्रेस्ट कैंसर हो जाता है। आनुवांशिक (Hereditary reasons) कारणों से भी ब्रेस्ट कैंसर होता है इसलिए शुरुआती जांच कराना बेहद जरूरी होता है। अगर पहले से ध्यान दे दिया जाए तो दवा के जरिए इसे ठीक किया जा सकता है। 

    कैंसर को रोकने के लिए या लक्षणों को मैनेज करने और सपोर्ट ट्रीटमेंट करने के लिए ‘योग’ (Yoga) एक समग्र समाधान के रूप में काम कर सकता है। चलिए जानें ‘योग’ के जरिए कैसे ब्रेस्ट कैंसर को रोका जा सकता है?

    सुखासन योग:
    इस योगासन के के लिए सीधे अपनी पीठ के साथ एक क्रॉस लेग्ड स्थिति में बैठें। श्वास लें और अपने निचले शरीर को अपने घुटनों पर रखकर अपनी बाहों को ऊपर उठाएं। आपकी बैठने की हड्डियों पर संतुलन बनाए रखें और आगे की ओर देखें।

    शलभासन योग:
    इस आसन में अपने कंधों के नीचे हथेलियों से पेट के बल लेटें। अपने पैरों को एक साथ रखें और पैर की उंगलियों को बाहर की तरफ सांस लें और दाहिने हाथ को ऊपर उठाएं और बाएं पैर को पीछे ले जाएं। घुटनों को सीधा रखें। जैसे ही आप अपना सिर और छाती ऊपर उठाते हैं, सांस छोड़ते हुए अपने धड़ को नीचे लाएं और दूसरी तरफ से भी इसे इसी तरह से दोहराएं। 10-15 सेकंड के लिए एक ही मुद्रा में रहें।

    अश्व संचालन योग:
    खड़े होकर अपने कंधों को आराम से रखें। यहां से अपने दाहिने पैर के साथ वापस कदम रखें और दाहिने घुटने को नीचे रखें। अपनी पीठ को सीधा रखते हुए सुनिश्चित करें कि आपके बाएं घुटने और टखने 90° पर एक ही सीध में हैं। अपनी हथेलियों को अपने हृदय-चक्र में शामिल करें और आगे देखें। दूसरी तरफ से भी इसी तरह से दोहराएं।

    सर्पासन:
    अपने पेट के बल लेट जाएं और अपनी उंगलियों को अपनी पीठ के पीछे रखें। एक सांस के साथ अपने ऊपरी शरीर को ऊपर की तरफ उठाएं और अपने पीछे अपने इंटरलॉक किए हुए हाथों को फैलाएं। अपने पैरों को फर्श से न उठने दें।

    नौकासन:
    चटाई पर बैठें और आगे की ओर अपनी पीठ को सीधा रखें। इनहेल करें और दोनों पैरों को 30 से 45 डिग्री पर उठाएं। कोशिश करें कि अपनी पीठ को न सटाएं और अपनी बैठने वाली हड्डियों पर संतुलन रखें। 

    नोट: चिकित्सक से परामर्श के बाद ही इन आसनों का अभ्यास करें। कृपया प्रशिक्षित योग शिक्षक के मार्गदर्शन ही योगासन करें।