Farmers protest

    नयी दिल्ली. जहाँ मोदी सरकार (Narendra Modi) द्वारा लाये गए विवादस्पद कृषि कानूनों (Farm Laws) के चलते, दिल्ली बॉर्डर पर अनेक किसान पिछले 100 दिनों से लाम बंद हैं।वहीं आज किसान आंदोलन के 100 दिन पूरे होने पर शनिवार यानी 6 मार्च को KMP (कुंडली मानेसर पलवल) एक्सप्रेसवे की 5 घंटे की नाकाबंदी के साथ साथ इस दिन को काला दिवस (Black Day) के रूप में चिन्हित किया जाएगा।इसके साथ ही आज  डासना, दुहाई, बागपत, दादरी,ग्रेटर नोएडा पर जाम किया जाएगा। आज के दिन सभी किसान काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराएंगे और विभिन्न टोल प्लाजा भी आज फ्री किये जाएंगे।

    दरअसल पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के वकील प्रेम सिंह भंगू की अध्यक्षता में हुई प्रेसवार्ता में दिल्ली सिंघु बॉर्डर से कानूनी पैनल के चार सदस्य रमिंदर सिंह, हरपाल सिंह, इंदरजीत सिंह और धरमिंदर सिंह भी शामिल हुए थे। अब इन सभी का कहना है कि दिल्ली में प्रवेश के सभी रास्तों को बंद किया जाएगा। अब यह जाम सुबह 11 से अपराह्न बाद 4 बजे तक रहेगा। 

    क्या हैं किसानों के आरोप:

    इसी के साथ प्रेम सिंह भंगू ने यह भी कहा कि 26 जनवरी के बाद से किसानों को मोदी सरकार द्वारा लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है।जहाँ सिंघु, टिकरी और गाजीपुर बॉर्डर के 36 किसान नेताओं पर तीन-तीन FIR दर्ज की गईं है। वहीं 151 किसानों को जेल में डाल दिया गया है। इसके साथ ही बीते 26 जनवरी की घटना पर 8 फरवरी तक गिरफ्तारियां जारी रहीं। इसके साथ ही भंगु का  कहना था कि पंजाब में किसानों को डराने के लिए अब भी रोजाना नोटिस भेजे जा रहे हैं। किसानों पर वह-वह धाराएं लगाई जा रही हैं, जो लगनी भी नहीं चाहिए। यह संविधान और लोगों के अधिकारों पर करारा हमला है। 

    इसके साथ ही प्रेम सिंह भंगू ने यह बताया कि वह खुद अभी तक 125 किसानों की जमानत करवा चुके हैं। वहीं रमिंदर सिंह पटियाला ने कहा कि अदालत ने पुलिस की कहानी को नकारते हुए इन सभी किसानों को तुरंत जमानत दी है। पैनल का यह भी कहना था कि जिन भी किसानों को पकड़ा गया है, उन्हें तुरंत छोड़ा जाए और उन पर दर्ज सभी मुकदमे भी तुरंत वापस लिए जाएं।

    क्या है अब तक की घटना:

    गौरतलब है कि बीते 1 दिसंबर से सरकार और किसानों के बीच बातचीत का दौर शुरू हुआ था।इससे पहले दौर की बैठक के बाद अब तक एक के बाद एक 11 दौर की बातचीत सरकार और तकरीबन 40 किसान संगठनों के नेताओं के बीच हो चुकी है।अनेक अलग-अलग प्रस्तावों के बावजूद, किसान मोदी सरकार के तीन कानून की वापसी और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर कानून बनाने की मांग पर ही अड़े रहे।

    इसके बाद मोदी सरकार ने कानून को लगभग डेढ़ साल तक स्थगित करने तक प्रस्ताव भी इन लोगों को दिया।जिसे किसानों ने सर्वसम्मति से पूरी तरह से ठुकरा दिया।बीते 16 दिसंबर को बॉर्डर बंद होने वाली दिक्कतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी एक सुनवाई शुरू हुई।लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने बॉर्डर खाली कराने को लेकर कोई भी आदेश देने से मना कर दिया।

    क्या था  सुप्रीम का कोर्ट केंद्र को सुझाव:

    इसके साथ ही साथ ही सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को सुझाव था कि कानूनों का अमल स्थगित करके एक कमेटी बनाई जा सकती है, जो किसानों की मांगों पर तुरंत ध्यान दे।इधर जब कई दौर की बातचीत के बाद भी किसान संगठन और सरकार गतिरोध खत्म करने में विफल रहे तो बीते 12 जनवरी को सु प्रीम कोर्ट ने इन तीन कानूनों के अमल पर रोक लगा दी।साथ ही एक चार सदस्यीय कमेटी का भी गठन हुआ, जिसे दो महीने के भीतर रिपोर्ट देने को बोला गया।लेकिन इधर कमेटी से जुड़े किसान यूनियन के सदस्य ने अपना ही नाम वापस ले लिया। वहीं बीते 26 जनवरी की घटना के बाद जब ऐसा लग रहा था कि आंदोलन अब खत्म होने को है।लेकिन तभी किसान नेता राकेश टिकैत के आंसुओं ने पूरे प्रदर्शन को फिर से नयी जान और हवा दे दी।

    अब यह भी बताया जा रहा है कि अब इस आंदोलन में महिलाएं भी फिर पुरे दम से उतरने वाली हैं। आगामी 8 मार्च को अब महिला दिवस पर बड़ी संख्या में महिलाएं भी सिंघु बॉर्डर पहुंचेंगी। अब जिस प्रकार से यह आन्दोलन उग्र हो रहा है उससे त्याही प्रतीत हो रहा है कि कहानी अभी दूर तक जाएगी।फिलहाल आज के हालतों को देखकर पुलिस ने भी अपने सुरक्षा इंतजामात बढ़ा दिए हैं।