Supreme court

    नयी दिल्ली: महाराष्ट्र के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 12 विधायकों ने पीठासीन अधिकारी के साथ कथित दुर्व्यवहार के लिए राज्य विधानसभा से एक साल के अपने निलंबन को बृहस्पतिवार को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी। अधिवक्ता अभिकल्प प्रताप सिंह ने कहा कि उन्होंने इन विधायकों की ओर से शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल की है और उन्होंने इन विधायकों को एक साल के लिए निलंबित करने के विधानसभा द्वारा पारित प्रस्ताव को चुनौती दी है।

    इन 12 विधायकों को पांच जुलाई को राज्य सरकार द्वारा विधानसभा अध्यक्ष के कक्ष में पीठासीन अधिकारी भास्कर जाधव के साथ ‘‘दुर्व्यवहार” करने के आरोप में एक साल के लिए विधानसभा से निलंबित कर दिया गया था।

    निलंबित किए गए 12 सदस्य संजय कुटे, आशीष शेलार, अभिमन्यु पवार, गिरीश महाजन, अतुल भातखलकर, पराग अलवानी, हरीश पिंपले, योगेश सागर, जय कुमार रावत, नारायण कुचे, राम सतपुते और बंटी भांगड़िया हैं। इन विधायकों को निलंबित करने का प्रस्ताव राज्य के संसदीय कार्य मंत्री अनिल परब ने पेश किया और ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।

    विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने आरोप को झूठा करार दिया था और कहा था कि घटना के बारे में जाधव का विवरण ‘‘एकतरफा” था। फडणवीस ने कहा था, ‘‘यह एक झूठा आरोप है और विपक्ष के सदस्यों की संख्या कम करने का प्रयास है क्योंकि हमने स्थानीय निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) कोटे पर सरकार के झूठ को उजागर किया है।” साथ ही कहा था कि भाजपा सदस्यों ने पीठासीन अधिकारियों से दुर्व्यवहार नहीं किया।

    हालांकि, जाधव ने इस आरोप की जांच कराने की मांग की थी कि शिवसेना के कुछ सदस्यों और उन्होंने खुद अभद्र टिप्पणी की थी और कहा था कि अगर यह साबित होता है तो वह किसी भी सजा का सामना करने के लिए तैयार हैं।(एजेंसी)