मोदी सरकार के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार बोले- यह सामान्य मंदी नहीं, ऐतिहासिक मंदी का दौर है

नई दिल्ली: IIM अहमदाबाद और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़े और वर्तमान सरकार के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने भारत की आर्थिक व्यवस्था पर चिंता जताते हुए बताया कि यह कोई सामान्य आर्थिक

नई दिल्ली: IIM अहमदाबाद और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़े और वर्तमान सरकार के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने भारत की आर्थिक व्यवस्था पर चिंता जताते हुए बताया कि यह कोई सामान्य आर्थिक संकट नहीं बल्कि देश के लिए सबसे बड़ा अर्थव्यवस्था में सुस्ती का दौर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह अर्थव्यवस्था में सुस्ती का समय सामान्य नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यह ‘कोई सामान्य मंदी नहीं, बल्कि भारत के लिए ऐतिहासिक मंदी’ है। साथ ही सुब्रमण्यम ने आर्थिक समस्या के कारण और इससे छुटकारा पाने के कुछ सुझाव भी दिए हैं। 

अरविंद ने बताया ग़ैर-पेट्रोलियम उत्पाद के आयात (import) और निर्यात (export) दर में क्रमशः 6% और 1% गिरावट है। साथ ही पूंजीगत वस्तु उद्योग वृद्धि में 10% की गिरावट हैं। वहीं उपभोक्ता वस्तुओं की उत्पादन (Consumer Goods Production) वृद्धि दर 2 वर्ष पहले 5% पर थी जो अब 1% हो गई हैं। उन्होंने आगे कहा की इन आकड़ो  को देखकर आप भारत की अर्थव्यवस्था का अंदाजा लगा सकते हैं।  

सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP पर बात करते हुए अरविंद ने कहा कि वर्ष 2011 से 2016 के बीच भारत की GDP डेटा को 2.5% बढ़ाकर बताया गया था। साथ ही उस समय यह भी कहा गया था कि GDP ही केवल अर्थव्यवस्था का पूर्ण मानदंड नहीं हैं। अरविंद ने इस पर कहा कि GDP को वैश्विक स्तर पर स्वीकार किया गया है और अगर देश की यह स्थिति है तो हमें विचार करने की बहुत जरुरत हैं। NDTV के प्रणय रॉय से बातचीत में पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमणियन ने यह बात कही। 

निर्यात, कंज्यूमर गुड्स और कर राजस्व के आंकड़े को निराशाजनक बताते हुए सुब्रमण्यम ने 2000 से 2002 तक भारत में हुए आर्थिक संकट पर बात की। उन्होंने कहा कि उस समय GDP वृद्धि दर 4.5% था परंतु बाक़ी के आँकड़े संतोषजनक थे लेकिन अभी के सभी आँकड़े या तो नकारात्मक हैं या लगभग उसके करीब है। अरविंद ने यह समझाया कि अगर नौकरियां पैदा करनी हैं तो देश में विकास, निवेश, निर्यात और आयात में वृद्धि होना बहुत जरुरी है जो तेज़ी से नीचे जा रही हैं। 

साथ ही सरकार ने जनता के लिए कई योजनाएं भी लाई लेकिन रोजगार में इससे कोई बहुत अधिक मदद नहीं मिल पाई। अरविंद सुब्रमण्यम ने मई 2019 में मुख्य आर्थिक सलाहकार पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने बताया कि सरकार ने 2011-12 से 2016-17 के बीच भारत की GDP को गलत बताया हैं। अरविंद ने कहा कि उस समय भारत कि GDP 4.5% थी जो की सरकार द्वारा बढ़ाकर बताई गई थी।