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    गुवाहाटी: असमिया साहित्यकार और पत्रकार होमेन बोर्गोहैन (Assamese Litterateur and journalist Homain Borgohain) का कोविड-19 संक्रमण के बाद जटिलताओं के कारण बुधवार को गुवाहाटी के एक अस्पताल (Hospital) में निधन हो गया। बोर्गोहैन 89 साल के थे और उनके दो बेटे हैं। वह कुछ साल पहले अपनी पत्नी और नामी साहित्यकार तथा पत्रकार निरूपमा बोर्गोहैन से अलग हो गए थे। होमेन बोर्गोहैन के 24 अप्रैल को संकमित होने की पुष्टि हुई थी और उन्हें गौहाटी मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था जहां संक्रमण से स्वस्थ होने पर सात मई को उन्हें छुट्टी दे दी गयी। उन्हें रात में एक स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उन्होंने बुधवार को छह बजकर 58 मिनट पर अंतिम सांस ली। चर्चित लेखक और स्तंभकार होमेन बोर्गोहैन को 1978 में उनकी किताब पिता-पुत्र के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था। उन्होंने देश में बढ़ती धार्मिक और सामाजिक असहिष्णुता के विरोध में 2015 में यह पुरस्कार लौटा दिया था। होमेन असमिया दैनिक ‘नियोमिया ब्रता’ के प्रधान संपादक थे। उन्होंने असम सिविल सर्विस अधिकारी के रूप में करियर की शुरुआत की थी। बाद में वह पत्रकारिता में आ गए और ‘अमार असम’, ‘असम बाणी’, ‘नीलाचल’, ‘सूत्रधार’, ‘नागरिक’, ‘सतसोरी’ जैसे लोकप्रिय अखबारों और पत्रिकाओं में काम किया।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने भी होमेन बोर्गोहैन के निधन पर शोक जताया। मोदी ने ट्वीट कर कहा, ‘‘होमेन बोर्गोहैन को असमिया साहित्य व पत्रकारिता जगत में उनके बहुमूल्य योगदान के लिए याद किया जाएगा। उनके कार्यों में असमिया जीवन और संस्कृति के विभिन्न पहलुओं की झलक देखने को मिलती है। उनके निधन से दुखी हूं। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदनाएं।” असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि होमेन के निधन से राज्य के लोगों ने अपना अभिभावक खो दिया। सरमा ने कहा, ‘‘असमिया साहित्य को समृद्ध करने वाले एक जगमगाते सितारे के दूर चले जाने से हम सब बहुत दुखी हैं। उनके निधन ने हमारे बीच शून्य उत्पन्न कर दिया है।”

    राज्य सरकार ने पूरे राजकीय सम्मान के साथ होमेन का अंतिम संस्कार कराने का फैसला किया और शिक्षा मंत्री रनोज पेगू को इसके लिए जरूरी इंतजाम करने को कहा गया। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रिपुन बोरा ने भी होमेन बोर्गोहैन के निधन पर शोक प्रकट करते हुए कहा कि वह धारा से हटकर चलने वाले साहित्यकार थे जिन्होंने समाज के सजग प्रहरी के रूप में योगदान दिया। उग्रवादी समूह उल्फा (आई) के स्वयंभू कमांडर इन चीफ परेश बरुआ ने भी होमेन के निधन पर शोक जताया।