दिल्ली की साकेत कोर्ट का बड़ा फैसला, आतंकी आरिज खान को सुनाई मौत की सजा

    नई दिल्ली: बटला हाउस मुठभेड़ मामले (Batla House Encounter Case) में दिल्ली की साकेत अदालत (Saket Court) ने सजा का ऐलान कर दिया है। अदालत ने आरोपी इंडियन मुजाहिद्दीन (Indian Mujahiddin) के आतंकी आरिज खान (Ariz Khan) मौत की सजा सुनाई है। अदालत ने अपने फैसले में आरोपी द्वारा किए कृत्य को ररेस्ट ऑफ़ द रेयर माना। इसके पहले अदालत ने शाम चार बजे तक अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। 

    इसी ममले को पिछली सुनवाई में अदालत ने इसे दोषी करार दिया था। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने अदालत से आरोपी को मृत्यु दंड देने का अनुरोध किया था। आदालत ने आतंकी को आर्म्स एक्ट और भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 307 के तहत दोषी करार दिया है। अदालत ने आरोपी पर 11 लाख रुपए का दंड भी लगाया था, जिसमें से 10 लाख शर्मा के परिवार को दिए जाऐंगे। 

    ज्ञात हो कि, 2008 में बटला हाउस में हुए एनकाउंटर के दौरान आरोप आरिज खान ने पुलिस अधिकारी मोहनचंद शर्मा को गोली मार दी थी। जिसके कारण उनकी मृत्यु हो गई है। जबकि पुलिसकर्मी बलवंत सिंह-राजवीर को भी जान से मारने की कोशिश की गई थीमुठभेड़ के बाद दोषी नेपाल भाग गया था। जिसे 2018 में गिरफ्तार किया गया। 

    सोनिया केजरीवाल ममता देश से माफ़ी मांगे

    बटला हाउस एनकाउंटर के फैसले पर केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, “सोनिया जी, अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, और दिग्विजय सिंह ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे और एक तरह से, आतंकवादियों के साथ पक्षपात किया था। मैं मांग करता हूं कि उन्हें राष्ट्र से माफी मांगनी चाहिए।”

    आज के फैसले में साबित किया पुलिस ने सही जांच की

    बटला हाउस एनकाउंटर के समय दिल्ली पुलिस आयुक्त रहे करनाल सिंह ने कहा, “आज के फैसले से पता चलता है कि पुलिस ने सही जांच की और इसका श्रेय (दिवंगत) अधिकारी मोहन चंद शर्मा और संजीव के यादव को जाता है। बटला हाउस एनकाउंटर के बाद भारतीय मुजाहिदीन के आतंकवादियों को खोजने में मदद मिली और उनके सांठगांठ का पर्दाफाश किया।”

    उन्होंने कहा, “एक मुठभेड़ के खिलाफ अपील करने के लिए एक प्रक्रिया है। लोगों को इसके परिणाम की प्रतीक्षा करनी चाहिए और फिर टिप्पणी करनी चाहिए। एनएचआरसी ने इसकी जांच (मुठभेड़) की और इसे वास्तविक बताया। उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय ने इसे स्वीकार कर लिया। बिना सबूत के लोगों को किसी एजेंसी के खिलाफ टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।”