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पटना. एक तरफ बिहार (Bihar) में चुनाव का बिगुल बज चूका है। वहीं अब बिहार में राजनीतिक उठा-पटक अब अपने चरम पर है। इसी कड़ी में नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के खिलाफ मैदान में उतरे  महागठबंधन में सीटों के बंटवारे का फ़ॉर्मूला भी तय हो चुका है।

indiaजिसके अनुसार  243 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव में आरजेडी (RJD) 144 सीटों पर जबकि कांग्रेस (Congress) 70 और लेफ्ट के दल 29 सीटों पर चुनाव में अपनी किस्मत आजमाएंगे। इस प्रकार से देखा जाए तो महागठबंधन में आरजेडी (RJD) और कांग्रेस (Congress) ही प्रमुख दल हैं। बाकी BJP और JDU वाले ‘सुशासन बाबु’ नितीश कुमार का इस बार अलग ही खेल है. 

इसके पहले ‘हम’ वाले जीतन राम मांझी, रालोसपा के ‘ताज’ उपेंद्र कुशवाहा और अब ‘VIP’ पार्टी वाले मुकेश सहनी, महागठबंधन से अपने रस्ते अलग कर चुके हैं। हाँ इन सबके बीच वामदलों का साथ महागठबंधन को मिला तो है लेकिन अब  प्रदेश की सियासत में इनका कितना प्रभाव होगा यह तो खैर समय पर ही निर्भर है। 

कहाँ से चले और कहाँ को पहुंचे दोनों गठबंधन!

देखा जाए तो कभी महागठबंधन के साथ रहे ‘हम’, रालोसपा और ‘VIP’पार्टी का अपने-अपने इलाके और समुदायों में व्यापक जनाधार है। लेकिन ठीक चुनाव से पहले सीटों के बंटवारे के असंतोष के चलते, ये तीनों दल अपना अपना रास्ता पकड़ चलते बने। जहाँ  जीतनराम मांझी JDU के संग हो लिए। वहीं उपेंद्र कुशवाहा का तेजस्वी के नेतृत्व से इंकार और इसके बाद ‘VIP’मुकेश सहनी भी आखिर बीते शनिवार को निकल लिए। इधर NDA कि भी अपनी समस्या है जहाँ  JDU और BJP तो राम-लक्ष्मण बन गए हैं वहीं  ‘हम’ वाले जीतनराम मांझी भी शत्रुधन बनकर आ चुके हैं। लेकिन इन सबके बीच NDAके सबसे  में पुरानी सहयोगी LJP के तरुण नेता चिराग पासवान,  JDU के खिलाफ दांत पिसे खड़े हैं और एक बागी का फर्ज अदा करने पर उतारू हैं।

2015 चुनाव में  क्या थी इनकी शक्ति 

जहाँ 2015 के विधानसभा चुनाव में JDU-RJD और कांग्रेस एक साथ मिलकर चुनाव लड़ने उतरी थी। वहीं इनके खिलाफ BJP-LJP थे । पिछली बार जहाँ RJD, 243 सीटों में से 81 सीटों पर काबिज हुई थी जो कि 18.4% वोट होते हैं । इसी प्रकार कांग्रेस  27 सीटों पर जीत के साथ   6.7% वोट हासिल कि थी। वहीं बेचारे 4 वामपंथी दलों को मिलाकर 3 % तक वोट ही हासिल हुए थे।     

इसके विपरीत नीतीश कुमार की JDUने 71 सीटें जीती जबकि 16.8 % वोट मिले थे। लेकिन कहानी पलटी जब 2017 में JDU ने RJD का साथ छोड़कर BJP से हाथ मिलाया। इस बार के चुनाव में  भी JDU-BJP साथ साथ है। BJP को जहाँ 2015 के चुनाव में 53 सीटों के साथ  24.4 % वोट मिले थे । LJP को 2 सीट और 4.8 % वोट और  जीतनराम मांझी की पार्टी ‘हम’  1 सीट और 2।3 फीसदी वोट के साथ थी । जबकि रालोसपा को 2 सीट और 2.6 % वोट हासिल हुए थे।

2010 के चुनाव में क्या था अलग ?

इससे पहले 2010 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार NDA का चेहरा थे  के फेस थे। इस चुनाव में भी  JDU-BJPका दोस्ताना था , जबकि RJD-LJP साथ मिलकर पारी खेले थे।  कांग्रेस इन सबमे अकेली थी । इस चुनाव में JDU को 115 सीटों पर जीत के साथ । जबकि 22.58% वोट हाथ लगे  थे। BJP, 55 सीट और 16.49% वोट ले चुकी थी । RJD को  54 सीटों  के साथ 18.84 % वोट मिले थे। जबकि कांग्रेस को 4  सीटऔर 8.37% वोट ही मिले थे। LJP,को  3 सीट और 6.74% वोट हाथ लगे थे ।

2019 के लोकसभा चुनाव में कैसे बदला  खेल 

अब अगर हम 2019 के लोकसभा चुनाव में इन्ही पार्टियों के प्रदर्शन पर गौर करें तो हम पायेंगे कि जहाँ NDA 40 में से 39 सीटों पर बाजी मरी थी और वोट प्रतिशत था 53.25%। वहीं UPA सिर्फ एक सीट के साथ  30.76% वोट हासिल कि थी । इसी प्रकार NDA से BJP को 17, JDU को 16 और LJP को 6 सीटों पर जीत मिली थी। UPA से जहाँ कांग्रेस मात्र एक सीट हासिल कर पाई थी वहीं RJD अपना खाता तक ना खोल पायी थी। 

अब अगर हम नतीजे  देखें तो 243 में से 96 विधानसभा सीटों पर BJP, 92 पर JDU आगे  थी। 35 पर LJP, वहीं  RJD को 9, कांग्रेस को 5, जीतनराम मांझी की ‘हम’ को 2 और रालोसपा को 1 सीट पर बढ़त  थी। वहीं  RJDकी अगुआई में  UPA को 30 % से अधिक वोट अधिकार मिला था।

कैसे होगा इस बार चुनाव 

बता दें कि इस बार कोरोना काल के बीच बिहार विधानसभा चुनाव का अलग ही रंग है जिस पर भी पुरे देश कि नजर है। इस बार बिहार में तीन चरणों में मतदान होने वाले हैं। पहले चरण की वोटिंग 28 अक्टूबर को होगी, दूसरे चरण की वोटिंग 3 नवंबर को होगी, जबकि तीसरे और अंतिम चरण की वोटिंग  7 नवंबर को होगी। इसके साथ ही  10 नवम्बर को चुनाव के नतीजे आ जायेंगे । इस बार  12 करोड़ से अधिक की आबादी वाले बिहार प्रदेश  में  7 करोड़ 31 लाख मतदाता होंगे जो इन सभी उपरोक्त पार्टियों और इनके नायकों के किस्मत का फैसला और बिहार की आने वाली अगली सरकार में अपने  जनादेश कि मुहर लगायेंगे।