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नयी दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी के विभिन्न बॉर्डरों पर नए कृषि कानूनों (Farm Laws) के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों (Farmers Protest) में सोमवार को ‘राष्ट्रीय महिला दिवस’ के मौके पर बड़ी संख्या में महिला किसानों (Female Farmers)  ने हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने न केवल प्रदर्शन का नेतृत्व किया बल्कि भीड़ को संभालने, चंदा जमा करने समेत अन्य जिम्मेदारियों को भी उठाया।

इसके साथ ही आज गाज़ीपुर बॉर्डर पर कृषि कानूनों के खिलाफ 21 महिलाएं 24 घंटों के लिए भूख हड़ताल पर बैठीं हैं। इसमें से एक प्रदर्शनकारी महिला ने बताया, “मुझे बहुत गर्व है कि मैं इसका हिस्सा बनी। हम यहां उम्मीद से ही बैठे हैं कि ये कानून रद्द होंगे, लेकिन हर बार बात टल जाती है। अब देखते हैं कि कल क्या होता है।”

गौरतलब है कि किसानों का गाज़ीपुर बॉर्डर(दिल्ली-यूपी) पर मोदी सरकार द्वरा लाये गए कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का आज लगातार 55वां दिन है। केंद्र सरकार और किसानों के बीच कल 10वें दौर की वार्ता भी होनी है। जिसमे कोई हल निकलना मुश्किल दिख रहा है क्योंकि किसान कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पर अब भी अड़े हुए हैं। 

वहीं पिछले करीब 52 दिन से ज्यादा समय से चल रहे इस प्रदर्शन में हिस्सा लेने के लिए विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में महिलाएं प्रदर्शन स्थल पर पहुंची हैं । कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन का केंद्र माने जा रहे सिंघू बॉर्डर पर महिला किसान चुनिंदा स्थानों पर लोगों के प्रवेश को नियंत्रित करती, विभिन्न स्वयंसेवकों के साथ समन्वय बिठाकर काम करती हुई दिखीं। ये सभी काम अब तक पुरुषों द्वारा किए जा रहे थे। महिलाओं ने यहां की दिनचर्या को पूरी तरह संभाला। 

ऑल इंडिया किसान संघर्ष कॉर्डिनेशन कमेटी की कविता कुरुगंती ने कहा, ‘‘ सिंघू बॉर्डर के मंच का प्रबंधन महिलाओं द्वारा किया गया और सभी वक्ता भी महिलाएं थीं। भारत के विभिन्न स्थानों पर महिला किसानों ने महिला किसान दिवस के मौके पर रैलियों, धरनों और बैठकों का आयोजन किया।” सिंघू बॉर्डर पर कृषि कानून के खिलाफ प्रदर्शन कर रहीं एक महिला ने कहा, ‘‘ मैं विभिन्न स्वयंसेवकों के साथ तालमेल बिठाने का काम कर रही हूं तथा बुजुर्गों की मदद भी कर रही हूं।” 

दिल्ली के कई महिला संगठनों ने संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा सोमवार को ‘महिला किसान दिवस’ मनाने के आह्वान को अपना समर्थन दिया। किसान एकता मोर्चा ने मौजूदा विरोध प्रदर्शन से जुड़े आधिकारिक ट्विटर हैंडल से सोमवार सुबह ट्वीट करते हुए सोशल मीडिया उपयोकर्ताओं से अपील की थी कि वे हैशटैग ‘महिला किसान कृषि कानूनों के खिलाफ है’ का इस्तेमाल करते हुए ट्वीट करें।

गौरतलब है कि कृषि कानूनों (Agriculture Bill) को लेकर किसान संगठनों (Farmer Organizations) और केंद्र सरकार (Central Government) के बीच होनी वाली बैठक टल गई है। अब यह बैठक 19 की जगह 20 जनवरी को दोपहर दो बजे विज्ञान भवन (Vigyan Bhavan) में होगी। वहीं इस बैठक के बारे में भारतीय कृषि कानून के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कल कहा कि, “आयोजित होने वाली बैठक में हम सरकार से बात करेंगे लेकिन उम्मीद नहीं है कि कुछ हल निकलेगा। 26 जनवरी को हम दिल्ली की आउटर रिंग रोड पर ट्रैक्टर रैली निकालेंगे, सरकार की जहां परेड होती है हम वहां नहीं जाएंगे।”