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नयी दिल्ली. उत्तर प्रदेश कोविड-19 के संदिग्ध मरीजों को रेलवे के डिब्बे में बने विशेष पृथकवास में रखने वाला पहला राज्य बन गया है। रेलगाड़ी के गैर वातानुकूलित डिब्बों में बदलाव कर तैयार पृथकवास वार्ड मऊ स्टेशन पर स्थापित किया गया है और अबत क कोविड-19 के 59 संदिग्ध मरीज इसमें भर्ती हुए हैं। अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि आठ मरीजों को छुट्टी दी जा चुकी है और 51 संदिग्ध मरीज पृथकवास वार्ड के तौर पर तैयार इन विशेष गैर वातानुकूलित बोगियों में भर्ती हैं जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि 20 जून को रेल डिब्बों में बनाए गए पृथकवास वार्ड में 42 मरीजों को जबकि 21 जून को 17 मरीजों को भर्ती किया गया। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में कोविड-19 के अब तक करीब 18 हजार मामले सामने आए हैं, जिनमें से 569 लोगों की मौत हुई है।

उन्होंने बताया कि ये डिब्बे मरीजों की मूलभूत जरूरतों से लैस हैं जैसे नहाने के लिए शावर, मच्छरदानी, बायो टॉयलेट, प्लग, ऑक्सीजन सिलेंडर और अन्य सुविधाएं। हालांकि, रेलवे के लिए एक बड़ी चुनौती धातु से बने इन डिब्बों के भीतर गर्मी में तामपान को स्थिर रखना है जिससे मरीजों को परेशानी नहीं हो, खासतौर पर तब जब तापमान सामान्य से अधिक चला जाता है। मऊ रेलवे स्टेशन पर अधिकारी ने बताया बोगियों में बड़े आकार के पंखे लगाए गए हैं और हवा की निकासी की उचित व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही बोगियों की छत को विशेष वस्तु से ढका जाएगा ताकि तापमान नियंत्रित रह सके। रेलवे इन बोगियों में तापमान को नियंत्रित रखने के लिए विभिन्न विकल्पों पर काम कर रहा है। इनमें बांस से बने परदे खिड़कियों पर लगाना और ऊष्मा का परार्वतन करने वाले पेंट छत पर लगाने से लेकर कूलर लगाने का विकल्प शामिल है।

अधिकारी ने बताया कि इन उपायों के बावजूद बोगी के भीतर तापमान को एक डिग्री सेल्सियस ही नीचे लाया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि उत्तर रेलवे ने बोगियों की छतों पर ऊष्मा का परार्वतन करने वाले पेंट का इस्तेमाल किया है जिससे बोगी के भीतर तापमान में 2.2 डिग्री तक कमी लाई जा सकती है। भारतीय प्रोद्यौगिकी संस्थान (आईआईटी) बंबई के सहयोग से विकसित इस पेंट की एक और परत लगाने की योजना है। रेलवे ने कहा कि इस पेंट के असर का परीक्षण बोगियों में कूलर रखकर किया गया जिससे तीन डिग्री तापमान कम करने में मदद मिली।

अधिकारियों ने कहा कि तापमान को नीचे लाने की कोशिशें जारी हैं। उन्होंने बताया कि अभी तक रेलवे ने पांच राज्यों -दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश- में कोविड मरीजों के देखभाल के लिए तैयार 960 डिब्बों को स्थापित किया है। इन डिब्बों को ‘‘कोविड केयर” नाम दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश के 23 स्थानों पर कोविड मरीजों के लिए 372 डिब्बों को स्थापित किया गया है।

इन स्थानों में लखनऊ, वाराणसी, पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन, आगरा, भदोही, कानपुर, सहारनपुर, फैजाबाद, मिर्जापुर, झांसी, झांसी कार्यशाला, नखा जंगल, सूबेदारगंज, गोंडा, भटनी, नौतनवा, बहराइच, मंडुवाडीह, फर्रुखाबाद, वाराणसी सिटी, मऊ, बरेली सिटी और कासगंज शामिल है। सरकार द्वारा कोविड-19 महामारी से निपटने की तैयारियों के तहत रेलवे ने 5,321 गैर वातानुकूलित शयनयान को कोविड-19 मरीज देखभाल केंद्र के रूप में बदला है और इनमें हल्के लक्ष्ण वाले मरीजों या संदिग्ध संक्रमितों को रखा जाएगा।