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    नयी दिल्ली. जहाँ एक तरफ कोरोना (Corona) की दूसरी लहर ने देश में आतंक मचाया हुआ है। वहीं दूसरी तरफ टीकाकरण (Vaccination) में फिलहाल धीमा ही चल रहा है। ऐसे में कोरोना वैक्सीनेशन की रफ्तार देश में तेजी आ सके,  इसको लेकर अब अमेरिकी कंपनी फाइजर (Pfizer) और मॉडर्ना (Moderna) को मोदी सरकार (Narendra Modi Goverment) बड़ी छूट देने को राजी हो गई है। इसके साथ ही अब इन दोनों वैक्सीन के भारत आने का रास्ता भी साफ हो गया है। वहीं कोरोना वैक्सीन के इस्तेमाल से जुड़े किसी भी दावे से कानूनी सुरक्षा की मांग पर अब अमेरिकी कंपनी फाइजर और सरकार के बीच बात बनती दिख रही है। सूत्रों के मुताबिक अब मोदी सरकार इस बात पर राजी हो गई है कि साइड इफेक्ट पर किसी कंपनी को जुर्माना नहीं देना पड़ेगा।

    दरअसल स्वास्थ्य मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक दूसरे देशों की सरकार ने भी ऐसा ही किया है। अमेरिकी कंपनी की इसी मांग के चलते टीके को मंजूरी मिलने में देरी हो रही थी। वहीं फाइजर की भारत में किसी भी टीके की मंजूरी के पहले स्थानीय परीक्षण के मामले में मोदी सरकार से वार्ता चल रही थी। इसमें भी अब कंपनी को छूट मिल गई है। इससे पहले फाइजर ट्रायल वाली शर्त के बाद इसके इमरजेंसी इस्तेमाल से अपना आवेदन वापस ले लिया था।

    गौरतलब है कि कोरोना वैक्सीन आयात में हो रही देरी और आलोचना के बीच मोदी सरकार की ओर से कहा गया कि वह 2020 के मध्य से ही फाइजर और मॉडेर्ना से टीका आयात पर बातचीत कर रही है। लेकिन सरकार ने अब इसके साथ ही बड़ी विदेशी टीका निर्माता कंपनियों को स्थानीय स्तर पर परीक्षण की जरूरत से भी छूट भी दी है।

    विदित हो भारत में भयंकर कहर बरपाने वाले कोरोना के B।1।617 वेरिएंट के खिलाफ अमेरिका की फाइजर और मॉडर्ना की  वैक्‍सीन को बहुत ही कारगर पाया गया है। इधर अमेरिका के शीर्ष संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉक्‍टर एंथनी फाउची ने भी कहा था कि न्‍यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के शोध में यह जानकारी निकलकर सामने आई है कि MRNA तकनीक पर आधारित दोनों ही कोरोना क्‍सीन म्‍यूटेशन के खतरे के बाद भी भारत में मिले कोरोना वेरिएंट के स्‍पाइक प्रोटीन को खत्‍म करने में बहुत ही सक्षम है।

    इधर भारत के शीर्ष दवा नियामक ने केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला, कसौली द्वारा विदेश में निर्मित कोरोना रोधी टीकों की जांच करने और ऐसी कंपनियों के लिए टीकों का इस्तेमाल शुरू करने के बाद ब्रिजिंग ट्रायल करने की अनिवार्यता में जरुरी छूट दे दी है जिससे टीकों की उपलब्धता अब देश में और बढ़ेगी।

    बता दें कि इसके पहले अब तक किसी भी विदेशी कंपनी को भारत में कोरोना वैक्सीन शुरू करने से पहले ब्रिजिंग ट्रायल करना होता था। जिसके तहत सीमित संख्या में लोगों पर टीके की प्रभावकारिता और सुरक्षा को परखा जाता है। DCGI के मुताबिक अब हाल ही में भारत में कोरोना के मामले बेतहाशा बढ़ने के कारण और टीकों की बढती मांग तथा देश की जरूरतों केा पूरा करने के लिए अब आयातित टीकों की उपलब्धता बढ़ाने की जरूरत को देखते हुए ही यह छूट दी गई हैं।