गुजरात  में फिर एक निर्भया की मौत, पुलिस ने अब तक नहीं की कोई गिरफ्तारी

नई दिल्ली, देश में बलात्कार और इससे जुडी हैवानियत के किस्से हम आये दिन पढ़ रहे हैं। इसी कड़ी में एक और कहानी जुड़ गयी है गुजरात की एक लड़की काजल की जो अब हमारे भ्रष्ट राजनीति और पंगु पुलिस व्यवस्था की

नई दिल्ली, देश में बलात्कार और इससे जुडी हैवानियत के किस्से हम आये दिन पढ़ रहे हैं। इसी कड़ी में एक और कहानी जुड़ गयी है गुजरात की एक लड़की काजल की जो अब हमारे भ्रष्ट राजनीति और पंगु पुलिस व्यवस्था की भेंट चढ़ गयी। ख़बरों के अनुसार उत्तर गुजरात में अरावली जिले के मोदासा तालुका के एक गाँव की 19 वर्षीय लड़की जो अनुसूचित जाति की है का शव गाँव के ही पेड़ से लटका पाया गया। वहीं इलाके की पुलिस के ऊपर गैरजिम्मेदाराना बर्ताव और लचर व्यवस्था के कारण जनता के कठघरे में खड़ी है। 

खबर के अनुसार पीड़िता लड़की गत 31 दिसबंर से लापता थी जिसके बाद उसका शव रविवार 5 जनवरी को पेड़ पर लटका मिला। वहीं पीड़ित पक्ष के लोगों का कहना है कि पीड़िता के लापता होने के बाद जब 3 जनवरी को वे रिपोर्ट दर्ज करवाने गाँव के स्थानीय पुलिस स्टेशन गए। वहीं पुलिस पर यह आरोप लगाया गया कि उन्होनें केस दर्ज करने से इनकार कर दिया वह भी यह कहते हुए कि पीड़िता अपनी मर्जी से किसी लड़के के साथ गई है और वहीं उसने शादी भी कर ली और अभी ठीक है। लेकिन पुलिस की कलई तब खुली जब इसके ठीक दो दिन बाद यानी 5 जनवरी को पीड़ित लड़की का शव गाँव के ही पेड़ से लटका पाया गया। 

वही जब रविवार को पीड़िता का शव मिला था, तो पुलिस ने इस घटना को आकस्मिक मौत के मामले के रूप में दर्ज किया। पुलिस इसे आत्महत्या का मामला भी मान रही थी। जिसके चलते स्थानीय लोगों ने और परिवार वालों ने नाराजगी जताई और एफआईआर दर्ज करने का विरोध शुरू कर दिया।इस पर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उनके पास पर्याप्त सबूत नहीं थे। वही लोगों के विरोध के दबाव में, अब पुलिस ने अत्याचार अधिनियम के विभिन्न धाराओं के साथ अपहरण, सामूहिक बलात्कार और हत्या के लिए बिमल, दर्शन, सतीश और जिगर के रूप में पहचाने गए चार व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है ।

 
इस पर पुलिस महानिरीक्षक – मयंकसिंह चावड़ा ने कहा हैं कि, "हमने पीड़ित के रिश्तेदारों द्वारा बताये गए तथ्यों पर मामले की जांच की और अन्य सभी कोणों से भी इसकी जांच कर रहें हैं, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है"। जब शव मिला तो पीड़िता के परिवार ने शव लेने से इनकार कर दिया था क्युँकि उनका कहना था कि ये आत्महत्या नहीं बल्कि बलात्कार और हत्या का केस है। केस दर्ज होने के बाद परिवार शव लेने के लिए मान गया जिसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। आखरी खबर के अनुसार इलाके के स्थानीय पुलिस इंस्पेक्टर को फिलहाल ड्यूटी से बर्ख़ास्त कर दिया गया है। अभी तक पुलिस की तरफ से कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। इस घटना पर सोशल मीडिया में अच्छा खासा घमासान मचा हुआ है और लोग पुलिस की कार्यप्रणाली पर अब प्रश्न उठा रहें है। फिलहाल एक और निर्भया मृत्युपरांत न्याय के इंतजार में है।