होली 2020: कोरोना ने डाला रंग में भंग

भारतीय संस्कृति में उत्सवों का जितना महत्व दिया जाता हैं. शायद ही किसी अन्य देशों में दिया जाता हो. होली हमारे देश के प्राचीन उत्सवों में से एक हैं. सनातन धर्म में होली का बहुत महत्व हैं. फाल्गुन मास

भारतीय संस्कृति में उत्सवों का जितना महत्व दिया जाता हैं. शायद ही किसी अन्य देशों में दिया जाता हो. होली हमारे देश के प्राचीन उत्सवों में से एक हैं. सनातन धर्म में होली का बहुत महत्व हैं. फाल्गुन मास की पुर्णिमा को मनाए जाने वाले इस त्योहार को रंगों और प्यार का त्यौहार भी कहा जाता हैं. इस दिन सभी लोग अपने सारे गले शिकवे भुलाकर, जात-धर्मं को परे रख कर एक दुसरे के साथ मिलकर रंगों का त्योहारों को मानते हैं. 

होली का दिन संस्कृति के साथ व्यवसाय के लिए भी महत्वपूर्ण होता हैं. शहरों के साथ ग्रामीण इलाकों में होली के रंगों से दुकाने सजी रहती हैं. बाजारों में विविध प्रकार के खिलौने, टोपी और पिचकारी आकर्षण का केंद्र बनी रहती हैं. पिछले कई वर्षो से चीन ने अपने खिलौनों, पिचकारियो आदि वस्तुयों से बाजारों में कब्ज़ा किया हुआ हैं. इस दिन इस्तमाल होने वाले घिलौने और अन्य वस्तुए चीन में निर्मित हुई होती हैं. लेकिन इस बार बाजारों में चीन से निर्मित वस्तुओं की भारी कमी हैं जिसके वजह से लोगों को ज्यादा कीमत देनी पड़ रही हैं. 

चीन में फैले कोरोना वायरस ने लोगों के स्वास्थ के साथ अर्थव्यस्था पर भी गहरा असर पड़ा हैं. पिछले वर्ष दिसंबर में फैले इस वायरस के वजह से के उत्पादन में बड़ी गिरावट दर्ज कि गई हैं. चीनी प्रशासन ने एतिहातन तौर पर देश के अधिकतर कारखानों को अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया हैं. आम तौर चीनी नववर्ष के दो हफ्ते के बाद  कारखाने खुलते हैं. लेकिन इस बार कोरोना वायरस के वजह से अभी तक बंद किए किए हुए हैं. 

एक महीने से पहले से देते हैं आर्डर 
भारत और चीन के बीच सालाना 70 बिलियन डॉलर से ज्यादा का व्यापार होता हैं. जिसमे त्योहारो की भूमिका काफ़ी महत्वपूर्ण होती हैं. भारत में होली के लिए जनवरी से ही तैयारी शुरू होजाती हैं. व्यापारी दिसंबर के आखिर में सामान के लिए आर्डर देते हैं. क्योंकि सामान को आने में एक महीने से ज्यादा का वक़्त लगता हैं. लेकिन इसबार कोरोना वायरस के वजह से स्तिथि बिगड़ गई हैं. भारतीय व्यापारी भी इससे सकते में हैं. वह चीन से सामानों को मांगने से बच रहे हैं. वहीँ घाटे से बचने के लिए पिछले वर्ष के बचे हुए सामना को उसी कीमत पर बेचा जा रहा हैं. 

पिचकारी, खिलौने के दामों में बढ़ोतरी 
भारत अपने खिलौने का 85 प्रतिशत चीन से आयत करता हैं. कारखानों में उत्पादन बंद होने और चीनी सामानों की कमी के कारण कीमतों में बड़ी बढोतरी हुई हैं. थोक मार्केट में रंगों, खिलौने और अन्य सामानों की कीमत में 50 से लेकर 100 प्रतिशत की वृद्धी हुई हैं. आमतौर पर 50 रुपए की मिलने वाली पिचकारी 100 रुपए में मिल रही हैं. जो मैजिक बलून 20 रुपए का आता था वह अब 35 रुपए का आरहा हैं. वहीँ भारत सरकार ने चीन ने आयत किए जाने वाले इन सामानों पर इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ा दी हैं. जिसके वजह से कीमतों में और भी इजाफा होगया हैं. 

आयत सामानों की होरही टेस्टिंग 
होली के लिए चीन से मगाए सामानों को आसानी से प्रवेश नहीं दिया जारहा हैं. सरकार हर वस्तुयों की टेस्टिंग करा रही हैं. जिसके वजह से इस महामरी से बचा जा सके. वहीँ इसकी रिपोर्ट को आने में 20 से 25 दिन लगते हैं. जिसके वजह से बाजारों तक पहुचने में और अधिक देरी होरही हैं. जो कीमत को बढ़ाने में मददगार साबित होरही हैं. 

देसी सामना की कीमत ज्यादा 
चीन से आयत सामानों की तुलना में भारत में निर्मित सामानों कि कीमत ज्यादा होती हैं. चीन में निर्मित वास्तु की गुणवत्ता और लगत काफ़ी कम होती हैं. वहीँ भारतीय सामानों की गुणवत्ता के साथ कीमत भी अधिक होती हैं और मुनाफा भी कम रहता हैं. इस वजह से व्यापारी चीनी वस्तुयों को ज्यादा प्राथमिकता देते हैं. लेकिन इसबार चीनी सामानों के कमी के कारण व्यापरी देशी सामानों पर निर्भर हैं. जिसके कारण कीमतों में काफ़ी इजाफा देखने को मिल रहा हैं.