जाने अब तक कितने आरोपियों को हुई है फांसी

भारत में, आजादी के बाद से 70 वर्षों में केवल 57 आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई गई है। स्वतंत्र भारत में सबसे पहली फांसी नाथूराम गोडसे को दी गई थी। भारत में हर साल कम से कम 130 आरोपियों को फांसी की

भारत में, आजादी के बाद से 70 वर्षों में केवल 57 आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई गई है। स्वतंत्र भारत में सबसे पहली फांसी नाथूराम गोडसे को दी गई थी। भारत में हर साल कम से कम 130 आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई जाती है, लेकिन वर्तमान में फांसी की सजा शून्य प्रतिशत पर सुनाई जा रही है. इसका मुख्य कारण यह है कि, माफी के लिए चलती लंबी प्रक्रिया, जो आरोपी को फांसी की सजा होने में विलंब करती है.

फांसी की सजा सुनाये जाने के मामले (पिछले दस वर्षों में)
उत्तर प्रदेश – 318
महाराष्ट्र – 108
कर्नाटक – 107
बिहार – 105
मध्य प्रदेश – 104

धनंजय चटर्जी: धनंजय चटर्जी इनका पहला नंबर आता है. चटर्जी पर 14 वर्षीय लड़की हेतल पारिख के बलात्कार और हत्या का आरोप लगाया गया था। 14 साल जेल में बिताने के बाद, उन्हें कोलकाता की जेल में 14 अगस्त 2004 को फांसी दी गई।

मोहम्मद अजमल आमिर कसाब : यह एक आतंकवादी था. जिसने 26/11 को पूरे मुंबई में हत्या को अंजाम दिया था। कसाब को पुणे के येरवाडा जेल में 21 नवंबर 2012 को फांसी दी गई थी।

अफजल गुरु : अफजल गुरु 13 दिसंबर, 2001 को संसद पर हुए हमले का मास्टरमाइंड था। अफजल गुरु को 9 फरवरी, 2013 को दिल्ली की तिहाड़ जेल में फांसी दी गई थी।

याकूब मेमन : 1993 में मुंबई में हुए 13 बम विस्फोटों में याकूब मेमन फायनांसर और प्रमुख सूत्रधारोंमें से एक था. उन्हें 30 जुलाई, 2015 को नागपुर में फांसी दी गई थी।

हालांकि निर्भया सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले में चार आरोपियों कों 1 फरवरी को फासी तय की गई थी. लेकिन दिल्ली की एक अदालत ने अगले आदेश तक दोषियों की फांसी पर रोक लगा दी है.