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  • सेना का सामरिक महत्व की 20 से अधिक चोटियों पर वर्चस्व

नयी दिल्ली. भारत और चीन की सेनाओं के बीच कोर कमांडरों की छठे दौर की वार्ता सोमवार को होने का कार्यक्रम है। इसमें मुख्य रूप से पूर्वी लद्दाख में दोनों देशों के सौनिकों को पीछे हटाना और तनाव घटाने पर बनी पांच सूत्री सहमति के क्रियान्वयन पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

सरकारी सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से चीन की ओर मोल्दो में सुबह नौ बजे यह वार्ता शुरू होने वाली है। सूत्रों ने बताया कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल में पहली बार विदेश मंत्रालय से एक संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी के इसमें हिस्सा होने की उम्मीद है।

उन्होंने बताया कि भारत इस वार्ता में कुछ ठोस नतीजे निकलने की उम्मीद कर रहा है। शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) से अलग 10 सितंबर को मास्को में विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके चीनी समकक्ष वांग यी के बीच हुई एक बैठक में दोनों पक्ष सीमा विवाद हल करने पर एक सहमति पर पहुंचे थे।

इन उपायों में सैनिकों को शीघ्रता से हटाना, तनाव बढ़ाने वाली कार्रवाई से बचना, सीमा प्रबंधन पर सभी समझौतों एवं प्रोटोकॉल का पालन करना और एलएसी पर शांति बहाल करने के लिये कदम उठाना शामिल हैं।

वार्ता में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह करने वाले हैं जो लेह स्थित भारतीय थल सेना की 14 वीं कोर के कमांडर हैं। जबकि चीनी पक्ष का नेतृत्व मेजर जनरल लियू लिन के करने की संभावना है, जो दक्षिण शिंजियांग सैन्य क्षेत्र के कमांडर हैं। एक सूत्र ने कहा, “वार्ता में भारत टकराव वाले स्थानों से चीनी सैनिकों को पूर्ण रूप से हटाये जाने पर जोर देगा।”

सूत्रों ने बताया कि दोनों पक्ष एक और दौर की वार्ता करने जा रहे हैं, वहीं भारत ने पैंगोंग झील के करीब टकराव वाले स्थानों के आसपास 20 से अधिक पर्वत चोटियों पर अपना वर्चस्व मजबूत कर लिया है। (एजेंसी)