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नयी दिल्ली. एक खबर के अनुसार साल 2020 की दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों की लिस्ट जारी हो चुकी है और हैरानी की बात यह है कि भारत (India) इस लिस्ट से बाहर हो चूका है। हमेशा की तरह अमेरिका (America) इस लिस्ट के शीर्ष स्थान पर बैठा हुआ है लेकिन इस साल लगभग दो अंकों का नुकसान भारत को भारी पड़ गया। साल 2019 की लिस्ट में जहाँ भारत दुनिया की प्रमुख शक्तियों में शुमार था। लेकिन इस बार भारत का नाम इस लिस्ट से गायब है। 

प्रमुख शक्तियों के लिस्ट से भारत बाहर:

दरअसल सिडनी स्थित लोवी इंस्टीट्यूट के एशिया पावर इंडेक्स 2020 की बात करें तो, 2019 में भारत का पावर स्कोर जहाँ 41.0 था, वहीं साल 2020 में यह घटकर 39.7 हो गया है। बता दें इस सूची में जिस देश का स्कोर  40 या इससे अधिक होता है वही  दुनिया की प्रमुख शक्ति माना जाता है। लेकिन जहाँ पिछले साल भारत इस लिस्ट में था वहीं इस साल अंको में आई गिरावट के करण वह लिस्ट से बहार है।

कोरोना से हुआ भारत को नुकसान:

वहींलोवी इंस्टीट्यूट ने अपनी  रिपोर्ट में कहा है कि निश्चित रूप से भारत फिलहाल मध्य शक्ति वाली सूची में चला गया है। लेकिन आने वाले वर्षों में यह देश फिर से इस सूची में शामिल हो सकता है। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि तमाम इंडो-पैसिफिक देशों के बीच भारत ने कोरोना संक्रमण के चलते अपने विकास की क्षमता से हाथ धो बैठा है।

चीन से भी पिछड़ा भारत :

इस रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख है कि भारत और चीन की जनसंख्या फिलहाल लगभग एक बराबर है। लेकिन आने वाले कुछ सालों में शायद भारत इस मामले में चीन को भी  पीछे छोड़ देगा। लेकिन, कोरोना संक्रमण के चलते दोनों देशों के बीच शक्ति की असमानता बढ़ गयी है। इस रिपोर्ट रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मौजूदा रूझानों के अनुसार, इस दशक के अंत तक भारत, चीन के कुल आर्थिक उत्पादन का केवल 40 % तक ही पहुंच पाएगा। जबकि 2019 के पूर्वानुमान में इसके 50 % होने की आशा भी जताई गई थी जो कि थोडा चिंता का विषय है।

आर्थिक क्षमता घटना है प्रमुख कारण :

द लोवी इंस्टीट्यूट ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि साल 2030 तक भारतीय अर्थव्यवस्था मूल रूप से कोरोना से पहले के पूर्वानुमान की तुलना में 13 % कम ही रहेगी। इसके कारण भारतीयों की खरीदी भी मंद पड़ने वाली है। वहीँ इन सबके चलते भारत का ‘फ्यूचर रिसोर्स मिजर्स’ अथार्त ‘भविष्य के संसाधनों के माप’ में भी लगभग पांच अंक की गिरावट दर्ज हुई है।

भारत का कूटनीतिक प्रभाव बढ़ा, रूस, दक्षिण कोरिया को भी छोड़ा पीछे : 

भारत के पक्ष में जो एक बात अच्छी निकलकर आई है वह एशिया में भारत का कूटनीतिक प्रभाव का पहले से बेहतर होना है। इससे एशिया क्षेत्र में भारत की बड़ी भूमिका निभाने की उपयोगिता सामने आई है। वहीं अब भारत के राजनयिक प्रभाव ने दक्षिण कोरिया और रूस को भी पीछे छोड़ा है और अब अमेरिका के बाद चौथे क्रम पर काबिज है।

कैसे देशों की शक्ति को तोलता है लोवी इस्ंटीट्यूट :

बता दें कि ऑस्ट्रेलिया का लोवी इंस्टीट्यूट हर वर्ष दुनिया के प्रमुख देशों की आर्थिक क्षमता, सैन्य क्षमता, आंतरिक स्थिति, भविष्य की प्लानिंग, दूसरे देशों से आर्थिक संबंध, डिफेंस नेटवर्क, राजनीतिक और कूटनीतिक प्रभाव और सांस्कृतिक प्रभाव का व्यापक अध्ययन कर अपनी इस सूची को जारी करता है। ताज्जुब की बात यह है कि इस साल की सूची में सबसे ज्यादा तेजी से ऊपर बढ़ने वाले देशों में वियतनाम का पहले नंबर पर होना है। वहीं दूसरे नंबर और तीसरे नंबर पर क्रमशः ऑस्ट्रेलिया और ताइवान खड़े हैं।

अगर लोवी इंस्टीट्यूट के इस अध्ययन और रिपोर्ट की माने तो निश्चित रूप से भारत के लिए एक चिंता की बात है लेकिन अगर हम कूटनीतिक प्रभाव की बात करें तो भारत निश्चित रूप से इस प्रकोष्ट में अव्वल  है खासकर रूस और दक्षिण कोरिया से। लेकिन यह भी सच है कि लोवी इंस्टीट्यूट यह रिपोर्ट भारत के लिए थोड़ी चिंता का विषय बन सकता है।