वर्ष 2019: साल रहा ऐतिहासिक फैसलों के नाम

वर्ष 2019 भारत के आधुनिक इतिहास में कई घटनाओं का साक्षी बना। जहाँ यह साल राजनीतिक उथल-पुथल के चलते दिसम्बर की सर्द रातों में देश के युवाओं को सड़कों पर लानेवाले नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) का

वर्ष 2019 भारत के आधुनिक इतिहास में कई घटनाओं का साक्षी बना। जहाँ यह साल राजनीतिक उथल-पुथल के चलते दिसम्बर की सर्द रातों में देश के युवाओं को सड़कों पर लाने वाले नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) का गवाह बना। वहीं यह साल  धारा 370 को निरस्त कर जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को रद्द करने से लेकर पुलवामा के आतंकवादी हमले  और फिर पकिस्तान के बालाकोट पर हुए साहसिक  सर्जिकल स्ट्राइक  का भी मूक दर्शक बना। चालिये जानते हैं साल 2019 को सिलसिलेवार रूप से। 

साल की शुरुआत में ही कश्मीरके पुलवामा में आतंकी हमला हुआ था। आपको बता दें की बीते १४ फरवरी  जम्मू- कश्मीर के अवंतीपोरा  के पास गोरीपोरा में अब तक का सबसे बड़ा आतंकी आत्मघाती हमला  हुआ था।  यह हमला सीआरपीएफ के वाहन को निशाना बनाकर आईईडी ब्लास्ट  के जरिए किया गया था।सीआरपीएफ के वाहनों पर यह हमला उस वक्त हुआ था, जब सेना के जवानों का काफिला जम्मू से श्रीनगर की ओर जा रहा था. इस आतंकी हमले में भारत ने अपने 44 वीर  जवान खो दिए थे। इसी के जवाब में भारत ने 26 फरवरी को भारत ने जवाबी हमला करते हुए तड़के पाकिस्तान के भीतर हवाई हमले कर कई आतंकवादी शिविरों को निशाना बनाया था। भारतीय वायुसेना के विभिन्न लड़ाकू विमानों ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बालाकोट में पाकिस्तान स्थित कई आतंकवादी समूहों के शिविरों को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया था। इस सर्जिकल स्ट्राइक में  भारतीय वायुसेना के पायलट अभिनंदन पाकिस्तान द्वारा पकड़ लिए गए थे जिन्हे बाद में भारत द्वारा कूटनीतिक दवाब के चलते पाकिस्तान द्वारा सकुशल छोड़ा गया।
 
 
 
वहीँ साल 2019 अप्रैल  में देश ने ऐतिहासिक लोकसभा चुनाव देखा जहाँ  तीन दशकों में ऐसा पहली बार हुआ जब एक राजनैतिक पार्टी  बीजेपी ने अपने दम पर स्पष्ट बहुमत हासिल किया था । जिसके चलते बाद में गठबंधन इकाई के रूप में, एनडीए ने लोकसभा में अपनी ताकत में और इजाफा किया। इस चुनाव की एक रोचक बात ये थी कि इसमें तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी अमेठी की अपनी पारिवारिक सीट और साख अपने निकटतम प्रतिद्वन्दी बीजेपी की स्मृति ईरानी के हांथो गवा बैठे थे। हालाँकि वे दूसरी सीट  केरल के  वायनाड से  जितने में कामयाब रहे , वह भी  एक रिकॉर्ड अंतर से। देखा जाए तो यह चुनाव बीजेपी के सर्वश्रेष्ट प्रदर्शन था लेकिन ये भी एक रोचक तथ्य है की वर्ष  2014 में कांग्रेस ने जितनी सीटें जीतीं थी, उससे अधिक सीटें  वह २०१९ के लोकसभा चुनाव में जीतने में कामयाब रहीं। वहीं एक और बड़ा आश्चर्य पश्चिम बंगाल में हुआ, जहां बीजेपी  ने राज्य की 42 में से 18 सीटें जीतीं। यह बंगाल में उसका अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। जबकि ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस २२ सीटों पर ही सिमट कर रह गयी थी, कांग्रेस सिर्फ दो सीटों पर ही कब्ज़ा कर सकी, जबकि वाम दल तो अपना खाता भी नहीं खोल सकी थी। देखा जाए तो नरेंद्र मोदी अपने पहले कार्यकाल की तुलना में ज्यादा मजबूत बहुमत के साथ लौटे और अमित शाह एक कामयाब रणनीतिकार साबित हुए।  
 
 
इसी साल 5 अगस्त, 2019 को को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 को खत्म करने की घोषणा की जिसके फलस्वरूप जम्मू और कश्मीर को उसके विशेष राज्य का दर्जा हट गया था। श्री शाह ने सदन में घोषणा करते हुए कहा कि  जम्मू और कश्मीर अब  दो केंद्र शासित प्रदेशों के जायेंगे। इस पर भारत में विभिन्न राजनीतिक संगठनों से बल्कि  अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी मजबूत प्रतिक्रियाएं मिली थी। जहाँ कश्मीर में प्रभावित क्षेत्र के निवासियों ने भी इस कदम का विरोध किया था, वहीं दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर के विभिन्न राजनीतिक नेताओं को घर में नजरबंद कर दिया गया था।शुरुआती विरोध के बाद, घाटी के विभिन्न हिस्सों में अनुच्छेद 144 लागू किया गया था और गलत सूचना के प्रसार को रोकने के लिए इंटरनेट और टेलीफोन सेवाओं भी स्थगित कर दीं गयी थी। 
 
 
साल 2019 की 22 अगस्त को पूर्व केंद्रीय मंत्री  पी चिदंबरम को केंद्रीय जांच ब्यूरो ने INX मीडिया मनी-लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था।उनकी कई जमानत याचिकाएं अलग-अलग अदालतों ने खारिज कर दीं गयीं थी और यह 106 दिनों के लिए तिहाड़ जेल में  में रखे गए थे।जहाँ केंद्रीय जांच ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय ने चिदंबरम पर मनी-लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अनियमिताओं  का आरोप लगाया था, वहीं कांग्रेस पार्टी ने सत्तारूढ़ बीजेपी द्वारा इसको बदले की  कार्रवाई या अमित शाह का  प्रतिशोध  करार दिया था। 
 
 
साल 2019 के 21 अक्टूबर को महाराष्ट्र विधान सभा चुनाव हुआ जिसमे शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के 18वें मुख्यमंत्री बने और शिवसेना से मुख्यमंत्री बनने वाले वह तीसरे व्यक्ति हैं। शिवसेना-एनसीपी -कांग्रेस गठबंधन सरकार का गठन विधानसभा चुनाव के परिणामों की घोषणा के 36 दिन बाद हुआ है। हाल में ही इस महा विकास अघाड़ी  का मंत्रिमंडल विस्तार हुआ  जिसमे आदित्य ठाकरे और एनसीपी के अजित ठाकरे मंत्रिमंडल में शामिल हुए। 
 
 
साल 2019 अयोध्या-बाबरी मामले के पटाक्षेप के लिए भी जान जायेगा। आपको बता दें की ९ नवंबर २०१९ को प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ नेराजनीतिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील और 134 साल से भी अधिक पुराने इस विवाद का ऐतिहासिक निर्णय दे दिया। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पीठ ने फैसला सुनाया कि विवादित स्थल पर राम मंदिर का निर्माण होगा। वहीं मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में ही अलग से 5 एकड़ जमीन दी जाएगी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार तीन महीने के अंदर राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाए, ताकि आगे की प्रक्रिया तय हो। 
 
 
साल 2019 के दिसंबर माह में  में संशोधन के लिए नागरिकता संशोधन विधेयक(CAB)2019 लाया गया जिसके चलते देश के चारो तरफ विरोध चल रहा हैं हालाँकि अब ये विधयेक न रहकर कानों बन गया है। यह कानून इसिलए लाया गया  जिससे चुनिंदा श्रेणियों में अवैध प्रवासियों को भारतीय नागरिकता देने का पात्र बनाया जा सके। इसके तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के छह समुदायों हिंदू, सिख, जैन बौद्ध, ईसाई और पारसी धर्म के लोगों को नागरिकता दी जाएगी। इनमें वह सभी शामिल होंगें जो अवैध रूप से भारत आए हैं या जिनके दस्तावेज की समय सीमा खत्म हो गई है। इन तीनों देशों से आए लोग बिना अपने माता-पिता के जन्म प्रमाण पत्र के अगर 6 साल तक भारत में रहते है तो उन्हें भारत की नागरिकता मिल जाएगी।वहीं  राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण या  नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजनशिप (NRC) एक ऐसा रजिस्टर है जिसमें सभी भारतीय नागरिकों के नाम दर्ज हैं। हाल-फिलहाल में यह केवल असम में ही लागू किया गया हैं। NRC असम में मूल रूप से राज्य में रहने वाले भारतीय नागरिकों की एक सूची है। NRC बनाने का उद्देश्य बांग्लादेश के सीमावर्ती राज्यों में विदेशी नागरिकों की पहचान के बारे में पता लगाना था। हालाँकि इसको लेकर भी देश में असंतोष व्याप्त है।